नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राजस्थान में हर पांच साल में सत्ता बदलने की परंपरा को लेकर राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने एक दिलचस्प और ह्यूमर से भरा जवाब दिया है। जयपुर में पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा,”राजस्थान के लोग सुबह लाल मिर्च की चटनी खाते हैं, इसलिए पांच साल बाद सरकार बदल देते हैं!
“रोटी को दोनों तरफ सेकते हैं, पर घी कहीं नहीं दिखता”
जयंत चौधरी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राजस्थान के लोग अपनी रोटियों को दोनों तरफ से सेकते हैं, लेकिन उन्हें घी नहीं मिलता। यह बयान उन्होंने सरकारों के कामकाज पर तंज कसते हुए दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोग किसी पर जल्दी भरोसा करते हैं और अगर काम में कमी दिखे तो उतनी ही जल्दी नाराज़ भी हो जाते हैं। यही कारण है कि वे हर 5 साल में बदलाव कर देते हैं। “लोगों के पास विकल्प नहीं होता, इसलिए लौट आते हैं वहीं” जयंत चौधरी ने यह भी कहा कि राजस्थान की जनता दिल की साफ होती है, जो बात मन में होती है, वह कह देती है। वे सरकारें बदलते हैं, लेकिन अगली बार फिर उसी को चुन लेते हैं क्योंकि उनके पास कोई ठोस विकल्प नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कोई मजबूत तीसरा विकल्प सामने आए, तो जनता उस पर भी भरोसा कर सकती है।
राष्ट्रीय लोकदल बनेगा तीसरा विकल्प
कार्यकर्ता सम्मेलन में जयंत चौधरी ने राष्ट्रीय लोकदल को राजस्थान की राजनीति में तीसरा विकल्प बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनके दादा और पिताजी की वजह से राजस्थान के लोग RLD का सम्मान करते हैं। “हमारे कार्यकर्ताओं में वो ताकत है जो किसी का भी मन मोह सकती है। अगर हम जनता के बीच जाकर ईमानदारी से काम करें तो वे हमें मौका जरूर देंगे।
नेताओं को भी मिलेगा नया मंच
जयंत चौधरी ने कहा कि जो नेता आज दूसरी पार्टियों में इधर-उधर जा रहे हैं, उन्हें अगर तीसरे मजबूत विकल्प का भरोसा मिल जाए, तो वे RLD को भी चुन सकते हैं। इस सम्मेलन में उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह अवाना द्वारा राज्य के सातों संभाग में रैली करने के फैसले की सराहना की। साथ ही कहा कि पार्टी में पद काम के आधार पर मिलना चाहिए, न कि सिफारिश से। “हर पदाधिकारी को लक्ष्य दें और जो मेहनत करे, वही असली नेता बने।” जयंत चौधरी ने हंसी-मजाक के अंदाज़ में एक गंभीर राजनीतिक सच्चाई पर चर्चा की। राजस्थान में सत्ता बदलाव की परंपरा को लेकर उन्होंने जो बातें कहीं, वह जनता के मूड को दर्शाती हैं। अब देखने वाली बात होगी कि RLD इस तीसरे विकल्प की भूमिका को कितना मजबूती से निभा पाती है।




