नई दिल्ली /रफ्तार डेस्क । राजस्थान में स्कूली इतिहास की किताब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जिसके चलते राज्य सरकार को उसे प्रतिबंधित करना पड़ा। यह किताब ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत’ शीर्षक से सरकारी स्कूलों में कक्षा 11 और 12 के लगभग साढ़े चार लाख छात्रों को पढ़ाई जा रही थी। विवाद की वजह यह रही कि पुस्तक में स्वतंत्रता के बाद भारत के इतिहास को कथित रूप से एकतरफा ढंग से पेश किया गया। आरोप है कि इसमें कांग्रेस से जुड़े नेताओं की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, जबकि भारतीय जनता पार्टी और उनके नेताओं के योगदान की अनदेखी की गई।
“छात्रों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़” – कांग्रेस
राजस्थान में इतिहास की किताबों पर लगे प्रतिबंध को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि देश की आजादी से लेकर अब तक भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी संगठनों की कोई ठोस भूमिका नहीं रही, ऐसे में किताब में उन्हें कैसे जगह दी जा सकती है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के शिक्षा मंत्री ने महज सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए किताबों पर बैन लगाया, जिससे छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर सीधा असर पड़ेगा।
‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत’ पर विवाद
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में आर्ट स्ट्रीम से पढ़ाई करने वाले करीब साढ़े चार लाख छात्रों को 11वीं और 12वीं कक्षा में इतिहास विषय की ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत’ नामक पुस्तक पढ़ाई जाती है। कक्षा 11 में इसका पहला भाग, जबकि 12वीं में दूसरा भाग शामिल है। यह किताबें अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शिक्षा पाठ्यक्रम में जोड़ी गई थीं। अब सामने आया है कि इन पुस्तकों में केवल कांग्रेस नेताओं को प्रमुखता दी गई है, जबकि अन्य राजनीतिक दलों, खासकर बीजेपी से जुड़े नेताओं के योगदान का उल्लेख बेहद कम या न के बराबर है। इसी वजह से इन किताबों को लेकर विवाद गहराया है और सरकार ने इन पर रोक लगा दी है।
इतिहास की किताब में नेहरू-गांधी परिवार को मिली खास जगह
इतिहास की इस किताब को लेकर विवाद इस कारण भी गहरा गया है क्योंकि इसमें नेहरू-गांधी परिवार को विशेष महत्व दिया गया है। किताब में पूर्व प्रधानमंत्रियों पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की व्यापक सराहना की गई है, साथ ही कांग्रेस के 15 नेताओं की तस्वीरें भी शामिल हैं। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की तस्वीरें तो सीधे कवर पेज पर छापी गई हैं।
आरोप यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को या तो पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है या फिर उनका उल्लेख बहुत ही कम किया गया है। यहां तक कि बीते 11 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री रहे नरेंद्र मोदी का नाम भी किताब में सिर्फ औपचारिक तौर पर लिया गया है, जबकि अन्य प्रमुख नेताओं को बिल्कुल जगह नहीं दी गई।
“सरकार यह आर्थिक बोझ उठाने को तैयार है”
इस किताब में जहां पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तस्वीरें प्रमुखता से प्रकाशित की गई हैं, वहीं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और लाल बहादुर शास्त्री जैसे राष्ट्रीय नेताओं को या तो बेहद सीमित स्थान दिया गया है या लगभग नजरअंदाज कर दिया गया है। जब यह बात सामने आई, तो राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने नाराजगी जाहिर की और तुरंत प्रभाव से इस किताब पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि भले ही इन किताबों की छपाई पर करोड़ों रुपये खर्च हुए हों, लेकिन सरकार यह आर्थिक बोझ उठाने को तैयार है।
“यह किताब जहर की तरह है” – शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने विवादित इतिहास की किताब पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे बच्चों के लिए “जहर की तरह” करार दिया है। उनका कहना है कि अगर गलती से हजारों रुपये खर्च करके जहर खरीद लिया जाए, तो सिर्फ पैसों के डर से उसे पिया नहीं जा सकता। ठीक वैसे ही यह किताब छात्रों के लिए जहर की तरह है। उन्होंने यह भी कहा कि इस किताब को हटाने से छात्रों की पढ़ाई या परीक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि इससे जुड़ी परीक्षा के अंक अंतिम परिणाम में जोड़े ही नहीं जाते।
कांग्रेस की कड़ी आपत्ति, सरकार पर पक्षपात का आरोप
राजस्थान सरकार द्वारा इतिहास की किताब पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर कांग्रेस ने तीखी नाराजगी जताई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। खाचरियावास ने कहा कि जिन लोगों ने देश की आजादी और उसके विकास में वास्तविक योगदान दिया, किताब में उन्हीं का जिक्र किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री किताब को अपनी पार्टी की विचारधारा के अनुरूप बदलवाना चाहते हैं।
“सरकार को भुगतना पड़ेगा खामियाजा”- प्रताप सिंह
प्रताप सिंह खाचरियावास ने राजस्थान सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा है कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की बातों को उनके अपने विभाग के अधिकारी भी गंभीरता से नहीं लेते। उनका आरोप है कि दिलावर केवल अपनी पार्टी में चर्चित बनने के लिए ऐसे विवादास्पद फैसले ले रहे हैं। खाचरियावास ने सरकार पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए इस कदम को पूरी तरह नाजायज बताया। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यह फैसला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।




