नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संशोधित आयकर विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया है। इस नए विधेयक में बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली प्रवर समिति की अधिकांश सिफारिशों को शामिल किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सरकार ने पिछले सप्ताह आयकर विधेयक, 2025 को वापस ले लिया था, जिसे पहली बार 13 फरवरी को संसद में पेश किया गया था। संशोधित विधेयक का उद्देश्य कर ढांचे को अधिक पारदर्शी, सरल और समावेशी बनाना है।
वित्त मंत्री ने पुराना विधेयक वापस लेने की बताई वजह
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्पष्ट किया कि 13 फरवरी को पेश किया गया आयकर विधेयक 2025 इसलिए वापस लिया गया, क्योंकि इसमें मिले सुझावों के आधार पर कई तकनीकी और कानूनी सुधार जरूरी हो गए थे। उन्होंने कहा, “नए मसौदे में भाषा की स्पष्टता, वाक्य संरचना, कानूनी संदर्भों और जरूरी संशोधनों को बेहतर तरीके से शामिल किया गया है।” सीतारमण के मुताबिक, पहले पेश किया गया विधेयक अगर कायम रहता तो कई स्तर पर भ्रम की स्थिति बन सकती थी। ऐसे में उसे वापस लेकर एक संशोधित और ज्यादा व्याख्यात्मक मसौदा पेश किया गया है, जो अब 1961 के आयकर कानून की जगह लेने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।
प्रवर समिति की प्रमुख सिफारिशें : –
आयकर विधेयक, 2025 की समीक्षा करते हुए प्रवर समिति ने मसौदे में कई तकनीकी त्रुटियों और अस्पष्ट प्रावधानों की ओर संकेत किया। समिति ने सुझाव दिए कि इन कमियों को दूर कर कानून को ज्यादा समझने योग्य, व्यावहारिक और मौजूदा व्यवस्था के अनुकूल बनाया जाए। प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैं :-
धारा 21 (संपत्ति का वार्षिक मूल्य) : “सामान्य क्रम में” जैसे अस्पष्ट शब्द को हटाने की सिफारिश की गई है। इसके स्थान पर खाली संपत्तियों के लिए वास्तविक किराया और मान्य किराया के बीच प्रत्यक्ष तुलना का प्रावधान जोड़ा जाए, जिससे आकलन अधिक पारदर्शी हो।
धारा 22 (गृह संपत्ति से आय पर कटौती) : समिति ने स्पष्ट करने को कहा है कि 30% की मानक कटौती केवल नगरपालिका कर की कटौती के बाद ही लागू हो। साथ ही, निर्माण-पूर्व ब्याज की कटौती को किराये पर दी गई संपत्तियों तक बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
धारा 19 (वेतन से संबंधित कटौती – अनुसूची VII) : पैनल ने सुझाव दिया कि ऐसे गैर-कर्मचारी व्यक्ति, जो किसी निधि से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें भी संशोधित पेंशन कटौती का लाभ मिलना चाहिए।
धारा 20 (व्यावसायिक संपत्तियों पर कर) : समिति ने उन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए भाषा में बदलाव की बात कही है, जहां व्यावसायिक संपत्ति अस्थायी रूप से उपयोग में नहीं है। ऐसी संपत्तियों पर गृह संपत्ति की आय के तौर पर टैक्स लगाने से बचने की सलाह दी गई है।
समिति का मानना है कि इन संशोधनों से विधेयक में न्यायसंगतता और पारदर्शिता बढ़ेगी और यह मौजूदा आयकर व्यवस्था के अनुरूप अधिक व्यवस्थित और संतुलित होगा।





