नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से एक ऐसी घोषणा की। जिसके बाद से एक बार फिर राजनीति गर्म हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किले की प्राचीर से सेकुलर सिविल कोड की जरूरत बताई। पीएम मोदी ने कहा कि वो कानून जो देश को धर्म के नाम पर बांटते हैं उन्हें दूर किया जाना चाहिये। पीएम मोदी ने कहा कि देश में एक सेक्युलर सिविल कोड की सख्त जरूरत है। गलत कानूनों का आज के समाज में कोई जगह नहीं है। पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा नागरिक संहिता एक कम्युनल नागरिक संहिता है। हमें एक धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की आवश्यकता है।
सांप्रदायिक कानूनों का संविधान में नहीं है जगह
लाल किले की प्राचीर पर 11वीं बार ध्वजारोहण करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करना भारत के 140 करोड़ लोगों का कर्तव्य है। मैं चाहता हूं कि इसपर बहस हो। जो कानून सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण हैं उनका कोई स्थान नहीं है। हमें एक धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की आवश्यकता है।
बार-बार चुनाव देश की प्रगति में रुकावट बनता है
इसके अलावा पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा कि देश में बार-बार चुनाव प्रगति में रुकावट बन जाते हैं। हर काम को चुनावी रंग में रंग दिया गया है। राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि भारत की प्रगति के लिए, संसाधनों का सर्वाधिक उपयोग लोगों के लिए हो। इसके लिए वन नेशन वन इलेक्शन के लिए आगे आना चाहिये।
क्या होता है यूनिफॉर्म सिविल कोड
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का अर्थ है कि देश में रहने वाले सभी धर्म, लिंग, जाति के लोगों के लिए एक ही कानून होना। अगर किसी राज्य में सिविल कोड लागू होता है तो विवाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे जैसे तमाम विषयों में हर नागरिकों के लिए एक सा कानून लागू होगा। संविधान के अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि देश के सभी लोगों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करना सरकार का दायित्व है।
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