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Thursday, March 19, 2026
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पनामा ने भारत को दिया समर्थन, शशि थरूर ने कहा- “चाहे हमें कितनी भी कीमत चुकानी पड़े नहीं देंगे कश्‍मीर”

कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल पनामा पहुंचा है। इस दौरान पनामा ने भारत के आतंकवाद के खिलाफ प्रयासों को अपना समर्थन देने का ऐलान किया।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय अभियान के तहत कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल पनामा पहुंचा। इस दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पनामा की नेशनल असेंबली का दौरा किया और वहां की स्पीकर डाना कास्टानेडा सहित कुछ प्रमुख सांसदों से मुलाकात की।

इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद पनामा ने भारत के प्रयासों को अपना समर्थन देने का ऐलान किया। असेंबली की अध्यक्ष डाना कास्टानेडा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश भारत के शांति मिशन में उसके साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि वैश्विक सहयोग से आतंकवाद पर विजय पाई जा सकती है। बता दें कि यह कूटनीतिक यात्रा भारत के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के गठजोड़ को बेनकाब कर रहा है।

“आतंकियों को सजा दिलाना जरूरी, केवल पीड़ा साझा करने से काम नहीं चलेगा” – शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि केवल अपना दर्द और नुकसान दुनिया को दिखाने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाया जाए कि वह आतंकवादी हमलों के दोषियों की पहचान करे और उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करे।

थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की आवश्यकता को स्पष्ट किया था। थरूर ने बताया कि इस हमले में 26 महिलाओं के माथे से सिंदूर जबरन मिटा दिया गया। कुछ महिलाएं तो आतंकियों के सामने चिल्ला उठीं, “हमें भी मार डालो”, लेकिन उन्हें लौटने के लिए कहा गया ताकि वे बाकियों को बता सकें कि उनके साथ क्या हुआ। हमने उनके दर्द को महसूस किया और यह निर्णय लिया कि आतंकियों पर कार्रवाई की जायेगी। 

“पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद अभी भी खतरा बना हुआ है”

पनामा सिटी में आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत पर पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद का खतरा अब भी टला नहीं है। उन्होंने कहा, “हम बीते चार दशकों से इस तरह के हमलों का सामना कर रहे हैं। 1989 में कश्मीर में शुरू हुए पहले संगठित आतंकवादी हमलों से लेकर आज तक, हमने अपने आम नागरिकों को बार-बार इस हिंसा का शिकार बनते देखा है।”

थरूर ने कहा कि अगर भविष्य में कोई और आतंकी हमला होता है, तो भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहमति मांगने के लिए फिर लौटना नहीं पड़ेगा, हमें अभी से आपका समर्थन चाहिए ताकि निर्णायक कार्रवाई की जा सके। इस अवसर पर पनामा की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष डाना कास्टानेडा ने भी भारत के रुख का समर्थन करते हुए कहा, “हमारे देश में आतंकवाद के खिलाफ बेहद कठोर कानून मौजूद हैं और हम भारत के साथ इस संघर्ष में खड़े हैं।”

“हमने पाकिस्तान के आतंकी गढ़ों पर किया सीधा प्रहार” 

कांग्रेस सांसद ने कहा कि भारत की रणनीति में अब निर्णायक परिवर्तन आया है। आज आतंकवादियों को यह एहसास होने लगा है कि उनके कृत्य बेअंजाम नहीं रहेंगे। अब वे यह समझ चुके हैं कि उन्हें इसकी गंभीर कीमत चुकानी पड़ेगी।  उन्होंने आगे बताया कि भारत अब सिर्फ नियंत्रण रेखा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से पार जाकर भी आतंक के अड्डों पर प्रहार किया गया है। हमने पाकिस्तान के पंजाबी क्षेत्र में स्थित 9 आतंकी अड्डों, ट्रेनिंग कैंपों और मुख्यालयों को निशाना बनाकर कार्रवाई की है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले दो दशकों में न्यूयॉर्क, लंदन, मैड्रिड सहित कई पश्चिमी शहरों में हुए आतंकी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़े रहे हैं। चाहे वे हमलावर पाकिस्तान में प्रशिक्षित रहे हों या सीधे वहीं से भेजे गए हों, इन घटनाओं में पाकिस्तान की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

“कश्मीर पाकिस्तान को सौंपने का सवाल ही नहीं उठता”

शशि थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की शांतिपूर्ण रहने की मंशा को पाकिस्तान ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा, “हमने हमेशा पड़ोस में शांति और सौहार्द की कामना की है, लेकिन दुर्भाग्यवश पाकिस्तान ने हमारी इस भावना का सम्मान नहीं किया। वह बार-बार हम पर हमले करता रहा है और उस क्षेत्र पर दावा करता है जो उसके नियंत्रण में कभी नहीं रहा।”

थरूर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का संवैधानिक और संप्रभु हिस्सा है। यह इलाका हमारे अधिकार क्षेत्र में है और रहेगा। पाकिस्तान चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले, हम उसे यह हिस्सा नहीं सौंपेंगे, चाहे इसके लिए हमें कितनी भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, जैसा कि हमने अतीत में कई बार चुकाया है।

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