नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। लोकसभा के स्पीकर पद पर आज ओम बिरला को ध्वनिमत से चुन लिया गया है। स्पीकर बनने के बाद ओम बिरला को सांसदो ने बधाई दी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपनी कैबिनेट का सदन से परिचय कराया। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपना पहला संबोधन किया। इस दौरान ओम बिरला ने जमकर इमरजेंसी की निंदा की। इस दौरान विपक्ष हंगामा करता रहा और ओम बिरला इमरजेंसी पर बोलते रहें।
ओम बिरला ने सदन के सभी सदस्यों का धन्यवाद किया
लोकसभा स्पीकर बनने के बाद ओम बिरला ने सदन में अपना पहला संबोधन किया। इस दौरान बिरला ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी के साथ सदन के सभी सदस्यों जिन्होंने मुझे फिर से सदन के अध्यक्ष के रूप में दायित्व निर्वाहन करने का अवसर दिया मैं उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूं…मुझें यह अवसर देने के लिए मैं सदन के स्पीकर के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और सदन के सभी सदस्यों को धन्यवाद देता हूं। इसके बाद स्पीकर समेत सत्ता पक्ष के नेताओं ने इमरजेंसी को लेकर 2 मिनट का मौन रखा। और इस दौरान विपक्ष नारेबाजी करता रहा।
इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया और संविधान पर हमला किया- ओम बिरला
2 मिनट के मौन के बाद आपातकाल का जिक्र करते हुए ओम बिरला ने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया और संविधान पर हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने इस दौर में कई ऐसे कार्य किए जिन्होंने संविधान की भावनाओं को कुचलने का काम किया। बिरला ने कहा ये सदन 1975 में इमरजेंसी लगाने के फैसले की कड़ी निंदा करता है। इसके साथ ही बिरला ने कहा हम उन सभी लोगों के दृढ़ संकल्पों की भी सराहना करते हैं, जिन्होंने इमरजेंसी का डटकर विरोद किया। साथ ही बिरला ने कहा कि हम उन लोगों के संघर्ष और भारत के लोकतंत्र की रक्षा की उनकी जिम्मेदारी का साम्मान करते हैं। 25 जून, 1975 भारत के इतिहास में हमेशा एक काला अध्याय रहेगा।
इमरजेंसी बाबा साहब आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान पर प्रचंड प्रहार था- ओम बिरला
इसके साथ ओम बिरला ने कहा कि इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई और बाबा साहब आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान पर प्रचंड प्रहार किया था। इमरजेंसी के दौरान भारत के सभी नागरिकों के अधिकारों को छीन लिया था। यह ऐसा कालाखंड है जो संविधान के ढांचे और न्यायिक स्वतंत्रता की आवश्यकता की याद दिलाता है। इमरजेंसी के दौरान भारत के नागरिकों के अधिकार नष्ट कर दिए गए, नागरिकों से उनकी आजादी छीन ली गई। ये वो दौर था जब विपक्ष के नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया, पूरे देश को जेलखाना बना दिया गया था। तब की तानाशाही सरकार ने मीडिया पर अनेक पाबंदियां लगा दी थीं और न्यायपालिका की स्वायत्तता पर भी अंकुश लगा दिया था। आपातकाल लगाने के बाद उस समय की कांग्रेस सरकार ने कई ऐसे निर्णय किए, जिन्होंने हमारे संविधान की भावना को कुचलने का काम किया।
हम संवैधानिक संस्थाओं में भारत के लोगों की आस्था की सराहना करते हैं- ओम बिरला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला आगे कहा कि क्रूर और निर्दयी कानून मीसा में कांग्रेस पार्टी ने बदलाव करके यह सुनिश्चित किया गया कि हमारी अदालतें मीसा के तहत गिरफ्तार लोगों को न्याय नहीं दे पाएं। इस काले कालखंड में ही संविधान में 38वां, 39वां, 40वां, 41वां और 42वां संशोधन किया गया। ओम बिरला ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कमिटेड ब्यूरोक्रेसी और कमिटेड ज्यूडिशियरी की भी बात कही, जो कि उनकी लोकतंत्र विरोधी रवैये का एक उदाहरण है। इमरजेंसी अपने साथ ऐसी असामाजिक और तानाशाही की भावना से भरी भयंकर कुनीतियां लेकर आई, जिसने गरीबों, दलितों और वंचितों का जीवन तबाह कर दिया।इमरजेंसी के दौरान लोगों को कांग्रेस सरकार द्वारा जबरन थोपी गई अनिवार्य नसबंदी का, शहरों में अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई मनमानी का और सरकार की कुनीतियों का प्रहार झेलना पड़ा। ये सदन उन सभी लोगों के प्रति संवेदना जताना चाहता है। अब जब हम इमरजेंसी के 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, ये सभा बाबा साहब के बनाए हुए संविधान की रक्षा की भावना को दोहराती है। और हम संवैधानिक संस्थाओं में भारत के लोगों की आस्था की सराहना करते हैं।
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