नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ सियासी गर्मी का नया कारण बन गई है। इसी बीच, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने इस योजना को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
हर साल करीब 35 हजार करोड़ रुपये खर्च
छगन भुजबल ने कहा कि ‘माझी लाडकी बहिन’ योजना से राज्य के खजाने पर भारी बोझ पड़ा है। उनके मुताबिक, सरकार को हर साल करीब 35 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जिसकी वजह से अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बजट पर असर पड़ रहा है। भुजबल ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति ऐसी ही रही, तो कई विकास परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
अन्य योजनाओं पर इसका असर
छगन भुजबल ने स्पष्ट कहा, “मुझे इस बात से कोई ऐतराज नहीं कि ‘माझी लाडकी बहिन’ योजना में सरकार का खर्च 35 हजार करोड़ से ज्यादा हो रहा है, लेकिन इसका असर अब दूसरी योजनाओं पर दिखने लगा है। दीवाली के मौके पर ‘राशन आनंद योजना’ जैसी योजनाओं में भी बजट की दिक्कतें सामने आ रही हैं।”
बाढ़ से किसानों को भारी नुकसान
भुजबल ने आगे कहा कि, इस साल भारी बारिश और बाढ़ ने राज्य के किसानों की कमर तोड़ दी है। उनकी खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं, जिसके चलते सरकार पर राहत कार्यों का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि, प्रभावित किसानों को गेहूं, चावल और नकद सहायता देने की प्रक्रिया तेजी से जारी है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
महाराष्ट्र सरकार एक ओर ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ के जरिए महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है, तो वहीं दूसरी ओर बाढ़ और बारिश से प्रभावित किसानों की मदद का दायित्व भी निभा रही है। इन दोनों मोर्चों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
एक्सपर्ट का मानना है कि, ऐसी योजनाएं भले ही राजनीतिक तौर पर लोकप्रियता दिला सकती हैं, लेकिन लंबे समय में राज्य के आर्थिक ढांचे पर भारी असर डाल सकती हैं।
क्या है माझी लाडकी बहिन योजना?
बता दे कि, महाराष्ट्र सरकार की ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ 21 से 60 वर्ष की महिलाओं को आर्थिक मदद देने के लिए शुरू की गई है। हाल ही में अपात्र लाभार्थियों के नाम सामने आने से योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। सरकार ने मामले की पारदर्शी जांच करने का आश्वासन दिया है।
राज्य सरकार ने कहा है कि, सभी लाभार्थियों की जांच पारदर्शी तरीके से की जाएगी, ताकि भविष्य में योजना के दुरुपयोग की संभावना न्यूनतम रहे और आर्थिक सहायता केवल योग्य महिलाओं तक पहुंचे।





