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एमसीयू की जांच तेज कर चालान न्यायालय में पेश किया जाए : दिग्विजय

भोपाल,15 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने प्रदेश की राजधाानी स्थित राष्ट्रीय मखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं विश्वविद्यालय में हुई गड़बडियांे की जांच को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। साथ ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच में तेजी लाकर आरोपियों के खिलाफ न्याायालय में चालान पेश करने की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा मुख्यमंत्री चौहान को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है कि, आपकी दूसरी और तीसरी सरकार के समय वर्ष 2008 से 2018 के बीच की गई अनियमितताओं, नियम विरूद्ध नियुक्तियों की जांच अब ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। जबकि आर्थिक अपराध अनुसंधान को इस मामले में तेजी से जांच करते हुए आरोपियों के विरूद्ध चालान प्रस्तुत करना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि, दादा माखन लाल चतुर्वेदी के नाम से तीन दशक पूर्व स्थापित पत्रकारिता विश्व विद्यालय अब पूरे देश में अपने कारनामों के लिये कुख्यात है। आपके शासन काल में इस विश्वविद्यालय में हुई अनेक गड़बड़ियों की जांच के लिये 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ ने त्वरित जांच कराते हुए कुलपति सहित 20 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो में 14 अप्रैल 2019 को एफ.आई.आर. दर्ज कराई थी। उन्होंने आगे लिखा है कि, अनेक प्रकार के गबन और घोटालों से जुड़े इस मामले में कांग्रेस सरकार रहने तक तो ई.ओ.डब्ल्यू. ने त्वरित कार्यवाही कर दस्तावेज एकत्र किये और गड़बडियां करने वालों के विरूद्ध अदालत में चालान प्रस्तुत करने की तैयारी कर ली थी। लेकिन जैसे ही आपने बिना जनमत से खरीद फरोख्त कर पिछले दरवाजे से सरकार बनाई ई.ओ.डब्ल्यू. से सारी जांच राजनीतिक दबाव में शिथिल कर दी है। आप यह अच्छी तरह जानते हैं कि वर्ष 2008 से 2018 तक के एक दशक में आर.एस.एस. के लोग और संस्थाओं को किस तरह नियम विरूद्ध लाभान्वित कर करोड़ों रुपए फूंके गये थे। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि, आरक्षण नियमों की धज्जियां उड़ाकर मुख्यमंत्री की नोटशीट के आधार पर नियुक्तियां की गई। यू.जी.सी. के नियमों को दरकिनार कर व्याख्याता, रीडर और प्रोफेसर सहित अनेक पदों पर नियुक्तियों की बंदरबांट की गई थी। ऐसा लगता था मानों इस पत्रकारिता विश्वविद्यालय में शासन के कोई नियम, निर्देश लागू ही नहीं होते थे। आश्चर्य है कि एक व्याख्याता जिसके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज है, दिल्ली स्थित केन्द्र सरकार के एक प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान का महानिदेशक बना दिया गया है। क्योंकि उसको आर.एस.एस. के शीर्ष प्रचारकों का संरक्षण प्राप्त है। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने मुख्यमंत्री चौहान से मांग की है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर और तथाकथित सांस्कृतिक संगठन के दबावों से बाहर निकलकर ई.ओ.डब्ल्यू. को तत्काल आरोपियों के विरूद्ध अदालत में चालान प्रस्तुत करने के निर्देश दें। –आईएएनएस एसएनपी/एएनएम

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