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Saturday, March 7, 2026
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दिल्ली में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अवकाश की घोषणा, सभी सरकारी दफ्तर और स्कूल रहेंगे बंद

दिल्‍ली की रेखा गुप्‍ता सरकार ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर 7 अक्टूबर को अवकाश घोषि‍त किया है। इस दिन सभी सरकारी कार्यालय और स्कूल बंद रहेंगे।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में 7 अक्टूबर को दिल्ली सरकार ने सरकारी अवकाश की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह निर्णय लिया गया, जिसके तहत दिल्ली सरकार के सभी कार्यालय और स्कूल उस दिन बंद रहेंगे। इस विशेष अवसर पर राजधानी दिल्ली में विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी शामिल होंगी। 

महर्षि वाल्मीकि : समानता, न्याय और साहित्यिक गौरव के प्रतीक

महर्षि वाल्मीकि को भारतीय साहित्य का ‘आदिकवि’ माना जाता है। उन्होंने रामायण की रचना कर न केवल साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि समाज को नैतिकता, समानता और मानवता का मार्ग भी दिखाया। वे केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और सम्मानजनक जीवन के पक्षधर भी थे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महर्षि वाल्मीकि के जीवन और विचार आज भी समाज को गरिमा और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्हीं के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए दिल्ली में श्रद्धांजलि सभाएं और जुलूस निकाले जाएंगे, ताकि लोग उनके योगदान और शिक्षाओं से जुड़ सकें।

7 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती पर क्या-क्या रहेगा बंद? 

दिल्ली सरकार ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार, 7 अक्टूबर को सरकारी अवकाश की घोषणा की है। आधिकारिक बयान में बताया गया है कि इस दिन सभी सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे, जिससे कर्मचारियों को छुट्टी मिलेगी और वे इस विशेष अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे। सभी स्कूल और शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहेंगे, जिससे छात्रों को भी इस दिन अवकाश मिलेगा। सरकार का यह निर्णय महर्षि वाल्मीकि के प्रति श्रद्धा और सम्मान के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की दिशा में देखा जा रहा है।

वाल्मीकि जयंती परंपरा का सम्मान

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अवकाश की परंपरा कोई नई बात नहीं है। दिल्ली की पूर्ववर्ती सरकारें भी इस अवसर पर अवकाश घोषित करती रही हैं। मौजूदा रेखा गुप्ता सरकार ने इस परंपरा को न केवल जारी रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निर्णय समाज में सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं। महर्षि वाल्मीकि के विचार, समानता, भाईचारा और आत्मसम्मान आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और यह अवसर उन आदर्शों को याद करने तथा उन्हें व्यवहार में लाने का एक प्रेरणादायक माध्यम बनता है।

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