नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार थम गया है। नेताओं ने प्रचार किया, रैलियां की, जनसभाएं की और लोगों से वोट मांगे। ऐसे में इस समय में राम रहीम का पैरोल पर बाहर आना कई सवाल खड़े कर देता है। राज्य में केवल उनका ही डेरा नहीं ब्लकि अन्य डेरे भी पार्टियों के वोट बैंक हैं।
लक्ष्मीपुरा डेरा
यह डेरा प्रभावशाली डेरों में गिना जाता है। जूना अखाड़े के कपिल महाराज इस डेरे के प्रमुख हैं। रोहतक के साथ ही आसपास के जिलों की करीब 12 विधानसभा सीटों पर इस डेरे का मजबूत प्रभाव माना जाता है।
राधास्वामी सत्संग व्यास
इस डेरे को मानने वालों में बड़ी संख्या दलितों की है। इसके आयोजन में PM नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी समेत BJP और कांग्रेस के बड़े नेता शामिल हो चुके हैं। इन डेरों का कहना है कि ये किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करते हैं।
बाबा मस्तनाथ मठ
रोहतक का बाबा मस्तनाथ मठ हरियाणा के प्रभावशाली डेरों में से एक है। इस मठ के अध्यक्ष बाबा बालक नाथ नाथ संप्रदाय के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।नाथ संप्रदाय के राष्ट्रीय अध्यक्ष यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। बाबा बालकनाथ यादव जाति से आते हैं।
निरंकारी डेरा
हरियाणा के निरंकारी डेरा के अनुयायियों की संख्या लाखों में है। अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, सोनीपत और करनाल में इस डेरे का वर्चस्व है। सीटों पर जीत या हार तय करने में इस डेरे के अनुयायियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
क्या होती है डेरों में मतदान का प्रक्रिया
मतदान के पहले वाली रात को अनुयायियों तक यह संदेश भिजवाया जाता है कि उन्हें किसका साथ देना है और किसका विरोध करना है। अगर डेरा सच्चा सौदा की बात करें तो इसमें एक राजनीतिक विंग हुआ करती थी। यह विंग यह निर्णय लेती थी कि डेरा प्रेमी किस दल को वोट करेंगे। अभी यह भंग हो चुकी है।




