नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जाति है कि जाती नहीं, यह प्रचलित लाइन तो आपने कई बार सुनी होगी। जब बात राजनीति की आती है तो इसका प्रभाव वोट बैंक के लिहाज से और ज्यादा बढ़ जाता है। लेकिन ओडिशा से ऐसा मामला निकल कर आया है जब पूर्व BJD सांसद को जाति की वजह से समाज ने 12 साल के लिए बहिष्कृत कर दिया है। इस फैसले के अनुसार पूर्व सांसद प्रदीप माझी के किसी भी पारिवारिक या सामाजिक कार्यक्रम में समाज का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं होगा।
दूसरी जाति की लड़की से शादी करने पर किया बहिष्कार
बीजेडी के पूर्व सांसद प्रदीप माझी ने 12 मार्च को दूसरी जाति की लड़की से शादी की थी। इसके बाद उनके खिलाफ अखिल भारतीय आदिवासी भतरा समाज की केंद्रीय समिति ने एक बैठक की जिसमें प्रदीप माडी का 12 साल के लिए बहिष्कार करने का फैसला किया। समाज का मानना है कि वह बार बार समाज के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी बहन की शादी भी ब्राह्मण परिवार में की थी। समुदाय का मानना है कि उनके बार बार ऐसे फैसले लेने से समाज की संस्कृति और परंपराएं खतरे में पड़ रही हैं।
आदिवासी भतरा समाज के फैसले के क्या हैं मायने
अखिल भारतीय आदिवासी भतरा समाज के इस फैसले के कारण अब समाज का कोई भी व्यक्ति प्रदीप माझी के किसी भी कार्यक्रम में नही जाएगा। इसमें शादी, जन्मदिन, पूजा, यहां तक कि अंतिम संस्कार जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं। इस फैसले के सामने आने के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं कि अगर कोई पू्र्व सांसद होकर समाजिक बेड़ियों से बंधा है तो उस वर्ग का क्या होता होगा जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं जिनके लिए समाजिक जीवन और समाज के लोग भी बहुत मायने रखते हैं।




