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Tuesday, March 10, 2026
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बीते दिन डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने किया था ऐलान… तो अब आया पोस्टमार्टम गाइडलाइंस पर नया अपडेट, जानिए क्या?

उत्तर प्रदेश सरकार ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और पीड़ित परिवारों के लिए सहूलियत भरी बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश सरकार ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और पीड़ित परिवारों के लिए सहूलियत भरी बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अब प्रदेश में शव का पोस्टमार्टम अधिकतम 4 घंटे में करना होगा, ताकि मृतकों के परिजनों को शव के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। यह निर्देश डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों को कम से कम परेशानी हो, इसी उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

4 घंटे में पूरा करना होगा पोस्टमार्टम

सभी जिलों में पोस्टमार्टम अधिकतम 4 घंटे के अंदर करना अनिवार्य किया गया है। CMO को 2 या उससे अधिक डॉक्टरों की टीमें बनानी होंगी, ताकि कार्य में देरी न हो। जिन जिलों में पोस्टमार्टम केस ज्यादा हैं, वहां विशेष ध्यान देने को कहा गया है। हत्या, आत्महत्या, यौन अपराध, क्षत-विक्षत शव, या संदिग्ध मृत्यु के मामलों में रात में पोस्टमार्टम नहीं होगा। अपरिहार्य परिस्थितियों में DM या अधिकृत अधिकारी की अनुमति से रात में पोस्टमार्टम हो सकता है। रात के पोस्टमार्टम के लिए 1000 वॉट की लाइट, सभी जरूरी उपकरण और संसाधनों की व्यवस्था अनिवार्य होगी।

वीडियोग्राफी जरूरी, पैसा नहीं लिया जाएगा

कानून व्यवस्था से जुड़े केस जैसे एनकाउंटर, पुलिस हिरासत में मौत, विवाह के पहले 10 वर्षों में महिला की मौत पर वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। यह वीडियोग्राफी रोगी कल्याण समिति या अन्य फंड से होगी। परिवार से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। महिला अपराध या महिला की संदिग्ध मौत पर महिला डॉक्टर की अनिवार्य भागीदारी होगी। अज्ञात शवों की पहचान के लिए DNA सैंपलिंग कराना होगा। सभी पोस्टमार्टम हाउस में कंप्यूटर ऑपरेटर और डेटा एंट्री ऑपरेटर तैनात किए जाएंगे। शव को अस्पताल से पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने के लिए कम से कम दो शव वाहनों की व्यवस्था सभी जिलों में की जाएगी।

डिप्टी CM का बयान

डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने कहा: “पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और त्वरितता जरूरी है। नई गाइडलाइन से न सिर्फ पीड़ित परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि कानून व्यवस्था की दृष्टि से भी यह सुधारात्मक कदम है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई पहल पोस्टमार्टम प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और तेज़ बनाएगी। इससे परिजनों को राहत मिलेगी, और कानून से जुड़े मामलों में निष्पक्षता भी सुनिश्चित होगी।

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