नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के बेदरे-कुटरू रोड पर नक्सलियों के IED ब्लास्ट में सुरक्षाबल के आठ जवानों और एक ड्राइवर की मौत हो गई है। 6 जनवरी की दोपहर को हुआ ये ब्लास्ट इतना जबरदस्त था कि जवानों को लेकर जा रही गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और ब्लास्ट की जगह पर करीब 10 फीट गहरा गड्ढा हो गया है। राज्य सरकार ने कहा है कि जब भी सुरक्षाबल नक्सलियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन चलाते हैं तब नक्सली बौखलाहट में इस तरह के हमलों को अंजाम देते हैं। सरकार ने घटना की उच्चस्तरीय जांच का आश्वासन दिया है। लेकिन ये IED होता क्या है और नक्सली इन्हें सड़कों पर प्लांट कैसे करते हैं।
IED क्या है?
IED का मतलब है इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस। यह एक तरह का बम है, जिसे नक्सली बारूद और स्थानीय चीज़ों का इस्तेमाल करके तैयार करते हैं। इन IED को नक्सली सड़क निर्माण के दौरान प्लांट कर देते हैं। ये IED दो तरह से काम करते हैं। पहला लंबी तार के जरिए इसका ट्रिगर नक्सली कहीं और रखते हैं। वहीं दूसरा, ये IED उस पर पड़ने वाले प्रेशर से एक्टिवेट हो जाते हैं। बस्तर क्षेत्र की सड़कों पर नक्सलियों ने कई-कई साल पहले से IED प्लांट करके रखे हुए हैं। साल 2016 में सुरक्षाबलों को 40 किलो IED मिला था, जो कि साल 2008 में प्लांट किया गया था।
IEDs को खोजना Anti Naxal Operation में एक बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में अनगिनत IED प्लांटेड हैं। अक्सर IED ब्लास्ट से स्थानीय लोगों की या जानवरों की मौत की खबरें बस्तर क्षेत्र से आती हैं। अप्रैल, 2023 में PTI ने अधिकारियों के हवाले से खबर छापी थी कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती वहां बिछे IEDs को खोजना और उन्हें डिस्पोज़ करना है। जनवरी, 2024 में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा था, ‘IEDs एक बड़ा खतरा हैं और मैं इस कोशिश में हूं कि हमें जमीन के अंदर दबे IED का पता लगाने वाली सबसे उन्नत तकनीक मिल जाए। मैंने गृहविभाग के अधिकारियों से कहा है कि वो ऐसे डिवाइज़ के बारे में पता लगाएं।’ उन्होंने कहा था कि IED की वजह से बस्तर क्षेत्र के नागरिकों, मवेशियों और वहां तैनात जवानों के ऊपर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।




