नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अरविंद केजरीवाल के दिल्ली सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद आज आतिशी ने आधिकारिक तौर पर दिल्ली के 8वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इस दौरान आतिशी ने कहा कि “मेरी स्थिति भगवान श्री राम के भाई भरत जैसी है। जब भगवान श्री राम वनवास गए थे और भरत को उनकी अनुपस्थिति में शासन करना पड़ा था”
कार्यभार संभालने के बाद आतिशी ने आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के प्रति प्रतीकात्मक इशारा करते हुए अपने बगल में एक खाली कुर्सी रखी। इस दौरान आतिशी ने कहा कि यह कुर्सी अरविंद केजरीवाल की है। मुझे पूरा भरोसा है कि दिल्ली की जनता 4 महीने बाद उन्हें दोबारा से दिल्ली की सत्ता में लाएगी और वो फिर से दिल्ली की सत्ता संभालेंगे।
शनिवार को आतिशी ने ली थी सीएम पद की शपथ
बता दें कि, आतिशी ने शनिवार को अपने मंत्रिमंडल के साथ दिल्ली सीएम पद की शपथ ली। आतिशी के साथ आप के वरिष्ठ नेता व विधायक गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन और मुकेश अहलावत भी मंत्री पद की शपथ ली। सभी नेताओं ने केजरीवाल सरकार से अपने विभाग बरकरार रखे। सौरभ भारद्वाज के पास 8 विभाग हैं। उन्होंने शनिवार को ही अपना कार्यभार संभाल लिया था।
मुकेश अहलावत को दिया गया श्रम विभाग
वहीं नए कैबिनेट मंत्री बनाए गए मुकेश अहलावत के पास श्रम, अनुसूचित जाति/ जनजाति और रोजगार विभाग हैं। गोपाल राय को विकास, पर्यावरण और सामान्य प्रशासन जैसे विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।
अरविंद केजरीवाल को क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी
कथित दिल्ली शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सीएम की कुर्सी छोड़ दी थी। आइये बताते हैं कि आखिर अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सीएम पद से इस्तीफा देकर क्या दांव खेला था?
अपनी कट्टर ईमानदार छवि को बचाने का प्रयास
अरविंद केजरीवाल के दिल्ली मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का सबसे बड़ा कारण उनकी कट्टर ईमानदार छवि को बचाना था। ताकि आगे आने वाले हरियाणा विधानसभा फिर अगले साल दिल्ली विधानसभा चुनाव में इसका फायदा उठाया जा सके। साल 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप को केजरीवाल की ईमानदार वाली छवि पर ही 70 में से 67 सीटें मिल पाई थी। कथित शराब घोटाला मामले में जेल जाने के चलते कहीं ना कहीं अरविंद केजरीवाल की ईमानदार वाली छवि पर असर पड़ा है।





