नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद दिल्ली को आज आतिशी के रूप में नया मुख्यमंत्री मिल गया है। आतिशी ने उपराज्यपाल सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लीं। आतिशी के साथ 5 विधायकों ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली।
बता दें कि, केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी को आम आदमी पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया था। आतिशी दिल्ली की कुर्सी पर बैठने वाली तीसरी महिला मुख्यमंत्री बन गई हैं। उनसे पहले बीजेपी की सुषमा स्वराज और कांग्रेस की शीला दीक्षित ने दिल्ली की कमान संभाली थी।
आतिशी के साथ 5 विधायकों ने भी कैबिनेट मंत्री पद की ली शपथ
आतिशी ने दिल्ली मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली हैं। आतिशी के साथ आप के वरिष्ठ नेता व विधायक गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन और मुकेश अहलावत भी आतिशी के साथ मंत्री पद की शपथ ले रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल को क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी
कथित दिल्ली शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सीएम की कुर्सी छोड़ दी थी। आइये बताते हैं कि आखिर अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सीएम पद से इस्तीफा देकर क्या दांव खेला था?
अपनी कट्टर ईमानदार छवि को बचाने का प्रयास
अरविंद केजरीवाल के दिल्ली मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का सबसे बड़ा कारण उनकी कट्टर ईमानदार छवि को बचाना था। ताकि आगे आने वाले हरियाणा विधानसभा फिर अगले साल दिल्ली विधानसभा चुनाव में इसका फायदा उठाया जा सके। साल 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप को केजरीवाल की ईमानदार वाली छवि पर ही 70 में से 67 सीटें मिल पाई थी। कथित शराब घोटाला मामले में जेल जाने के चलते कहीं ना कहीं अरविंद केजरीवाल की ईमानदार वाली छवि पर असर पड़ा है।
अदालत ने बांध दिए थे हाथ-पैर
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि केजरीवाल ने सोची-समझी रणनीति के तहत दिल्ली सीएम पद से इस्तीफा दिया था। उसका सबसे बड़ा कारण सुप्रीम कोर्ट का सशर्त जमानत है। जिसमें ना तो वो किसी फाइल पर दस्तखत कर सकते हैं और ना ही सीएम ऑफिस में जाकर कोई काम कर सकते हैं। अदालत ने एक तरह से उनके हाथ-पैर बांध दिए थे। जिसकी वजह से उन्होंने इस्तीफा देना जरूरी समझा।
आतिशी को क्यों चुना
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने आतिशी को ही अपना उत्तराधिकारी इसलिए चुना क्योंकि वो एक महिला होने के साथ-साथ केजरीवाल के प्रति काफी वफादार रही हैं। केजरीवाल और आतिशी के बीच की नजदीकी का पता इस बात से चलता है कि 15 अगस्त को केजरीवाल ने जेल से ही आदेश दिया था कि उनकी गैर-मौजूदगी में पार्टी मुख्यालय में आतिशी झंडा पहराएंगी। इससे पहले कई मौकों पर वो आतिशी को फ्रंट पर रख चुके हैं।





