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Sunday, March 22, 2026
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पूर्व CJI पर जमकर बरसा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, डीवाई चंद्रचूड़ को बताया पूरे विवाद की जड़

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश में मस्जिदों के सर्वे को लेकर अपना विरोध जताया है। उन्होंने कहा है कि इन सब के लिए पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ जिम्मेदार हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। संभल जामा मस्जिद और अजमेर शरीफ दरगाह पर निचली अदालतों के फैसलों के बाद से पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ पर आरोप लगाए जाने लगे हैं कि उनके फैसले के बाद से ही देश में धार्मिक स्थलों के सर्वेक्षणों और याचिकाओं के लिए रास्ता खुल गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने कहा है कि वर्ष 2023 में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के सर्वे की जो अनुमति दी थी, वो सरासर गलत थी। समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बरक और मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा है कि पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ का फैसला गलत था। उनके इस फैसले के कारण देश में और सर्वे की याचिकाओं का रास्ता खुल गया है। देश के सर्वाच्च न्यायालय को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और इस तरह के सर्वे पर रोक लगानी चाहिए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ को ठहराया जिम्मेदार

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी इस मामले में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ का फैसला Places Of Worship Act, 1991 के सख्त खिलाफ था। इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि बाबरी मस्जिद मामले में देश के सर्वाच्च न्यायालय ने इस अधिनियम का हवाला देते हुए कहा था कि 15 अगस्त 1947 से पहले के किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता है। लेकिन पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के सर्वे की अनुमति देकर अपनी स्थिति नरम कर दी है।

महबूबा मुफ्ती ने भी पूर्व CJI पर निशाना साधा था

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी 29 नवंबर 2024 को देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को संभल हिंसा का जिम्मेदार बताते हुए कहा था कि पूर्व CJI ने गलत काम किया है। उन्होंने ही ज्ञानवापी मस्जिद पर यह फैसला सुनाया था कि आप इसका सर्वे कर सकते हैं। इसके बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि देश के सर्वोच्च न्यायालय का वर्ष 1991 का एक जजमेंट है कि 15 अगस्त 1947 से पहले के किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता है। लेकिन पूर्व मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बाद से अब मस्जिद में सर्वे किए जा रहे हैं। अब राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह में भी शिवलिंग ढूंढें जा रहे हैं। अजमेर शरीफ दरगाह में बड़ी संख्या में हिन्दू लोग भी जाते हैं। यह मस्जिद 800 साल पुरानी है।

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