नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार ने हाल ही में कहा था कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को जिम्मेदार बयान देने चाहिए। इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस पर एक और सनसनीखेज आरोप लगाया है।
प्रयागराज पुलिस पर ग्राफ के साथ आरोप
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक ग्राफ शेयर करते हुए दावा किया कि प्रयागराज पुलिस में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA वर्ग) को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। उन्होंने लिखा, “90% PDA को प्रयागराज पुलिस में केवल 25% प्रतिनिधित्व। ये है पीडीए के साथ किया जा रहा ‘आनुपातिक अन्याय’।”
क्या है अखिलेश का दावा?
सपा प्रमुख ने बताया कि प्रयागराज में कुल 44 थानेदारों की पोस्टिंग हुई है, जिनमें से केवल 11 PDA वर्ग से हैं। जबकि 14 सिंह (राजपूत जाति) और 19 अन्य जनरल कैटेगरी से हैं। अखिलेश ने यह भी कहा कि ये आंकड़े उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट से लिए हैं। अखिलेश के दावे पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए प्रयागराज पुलिस ने सोशल मीडिया पर ही जवाब दिया। पुलिस का कहना है कि अखिलेश द्वारा पोस्ट की गई जानकारी गलत है।
प्रयागराज पुलिस ने जवाब में लिखा
“जनपद प्रयागराज में थाना प्रभारी की नियुक्ति कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा, सामाजिक सद्भाव और जन शिकायतों के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर होती है। जनपद में तैनात लगभग 40% थाना प्रभारी OBC और SC/ST वर्ग से हैं। नियुक्ति की प्रक्रिया निष्पक्ष है।
राजनीति बनाम हकीकत: किसकी बात सच?
यह मुद्दा अब सिर्फ एक प्रशासनिक बहस नहीं, बल्कि सियासी बहस का भी केंद्र बन गया है। सपा जहां पुलिस पर जातीय भेदभाव के आरोप लगा रही है, वहीं पुलिस खुद को निष्पक्ष बताने पर जोर दे रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सपा अपने इन आरोपों को किस हद तक आगे ले जाती है और क्या यूपी सरकार या चुनाव आयोग इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं या नहीं।




