नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइट क्लब अग्निकांड मामले में पुलिस ने फरार आरोपी अजय गुप्ता को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। जब पुलिस टीम उसके घर पहुँची थी, तो वह वहां मौजूद नहीं था। इसके बाद कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट हासिल कर पुलिस ने मंगलवार को अजय गुप्ता को हिरासत में लिया है।
गोवा नाइट क्लब अग्निकांड मामला
बता दें कि 7 दिसंबर को गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइट क्लब में हुए फायर शो के दौरान लगी भीषण आग में 25 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे के बाद क्लब के मालिक गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा थाईलैंड भाग गए। गोवा पुलिस ने दोनों के पासपोर्ट रद्द कराने के लिए रीजनल पासपोर्ट ऑफिस को नोटिस भेजा है। वहीं, क्लब के अन्य मालिकों गुरुग्राम के अजय गुप्ता और ब्रिटिश नागरिक सुरिंदर कुमार खोसला के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया ताकि वे देश छोड़कर फरार न हो सकें।
गोवा सरकार ने नाइट क्लब अग्निकांड के बाद कड़ी कार्रवाई की
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस हादसे को गंभीर प्रशासनिक और नैतिक चूक करार देते हुए जिला प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिए हैं कि राज्य में संचालित सभी अवैध क्लब, बार और मनोरंजन स्थलों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने साफ कहा कि गोवा की सुरक्षा और प्रतिष्ठा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जो भी प्रतिष्ठान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते, उन्हें बिना विलंब सील या ध्वस्त किया जाए।
मुख्यमंत्री के आदेश पर गोवा पर्यटन विभाग ने वागाटोर में लूथरा ब्रदर्स के अवैध बीच शैक ‘रोमियो लेन’ को जमींदोज कर दिया। सरकारी जमीन पर बने 198 वर्ग मीटर के लकड़ी के ढांचे को दो घंटे में भारी मशीनरी की मदद से ध्वस्त किया गया। पुलिस की एफआईआर में बताया गया है कि फायर शो के दौरान क्लब में फायर एक्सटिंग्विशर, स्प्रिंकलर, इमरजेंसी अलार्म या स्मोक एक्सट्रैक्शन सिस्टम जैसी सुरक्षा सुविधाएं मौजूद नहीं थीं, और क्लब शुरू होने से पहले कोई फायर ऑडिट भी नहीं किया गया था।
सुरक्षा जांच मजबूत करने के लिए नई समितियां गठित
गोवा सरकार ने नाइटक्लब, बार, रेस्तरां, होटल, बीच शैक और इवेंट वेन्यू पर रैंडम सुरक्षा जांच कराने के लिए नई समिति गठित की है। इस समिति का नेतृत्व जीसीएस अधिकारी करेंगे और इसमें पुलिस इंस्पेक्टर, फायर ऑफिसर, पीडब्ल्यूडी और बिजली विभाग के इंजीनियर भी शामिल हैं। समिति फायर सर्टिफिकेट, सुरक्षा उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट, विद्युत वायरिंग, भवन क्षमता और ध्वनि नियमों का निरीक्षण करेगी और प्रत्येक माह डीएम को रिपोर्ट सौंपेगी। इसके अलावा, राज्य सरकार ने लाइसेंसिंग और सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए एक दूसरी समिति भी गठित की है।





