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Tuesday, March 10, 2026
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यूपी में पहली बार डिजिटल अरेस्ट पर 7 साल की सजा, CBI अधिकारी बन महिला डॉक्टर से ठगे थे 85 लाख

यूपी की राजधानी लखनऊ में महिला डॉक्टर से 85 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया था। खुद को CBI अधिकारी बताकर KGMU की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये ठगे गए थे।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । देश में उत्तर प्रदेश ही एक मात्र ऐसा राज्‍य है जहां पर डिजिटल अरेस्ट मामले में पहली बार सजा सुनाई गई है। यह मामला ठगी से जुड़ा हुआ है। राज्‍य राजधानी लखनऊ में महिला डॉक्टर से 85 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया था। खुद को CBI अधिकारी बताकर KGMU की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये ठगे गए थे। इस फर्जी तरीके से पैसे ऐठने वाले को साइबर अपराधी देवाशीष को कोर्ट ने 7 साल की सजा सुनाई है। 

बता दें कि, यूपी की राजधानी लखनऊ में खुद को CBI अधिकारी बताकर एक सीनियर डॉक्‍टर सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये ठगने वाले साइबर अपराधी कोर्ट ने दोषी माना है। और उसे सात साल सजा सुनाई। यह ऐतिहासिक फैसला स्पेशल CJM अमित कुमार ने सुनाया। 

14 महीने के भीतर कोर्ट ने सुनाई सजा

मामले की विवेचना साइबर थाना लखनऊ ने की थी और इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव द्वारा कोर्ट में ठोस साक्ष्य और सबूत पेश किए गए। साइबर क्राइम के इतिहास में यह देश का पहला मामला है जिसमें डिजिटल अरेस्ट के आरोप में 14 महीने के भीतर कोर्ट से सजा सुनाई गई है।

जानिए पूरा मामला 

मामले के संबंध में अभियोजन अधिकारी मषिन्द्र ने जानकारी देते हुए बताया कि, 15 अप्रैल 2024 को डॉ. सौम्या गुप्ता KGMU में अपनी ड्यूटी कर रही थीं। तभी आरोपी देवाशीष ने उन्हें कॉल कर खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि वह दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से बोल रहा है। उसने दावा किया कि डॉ. गुप्ता के नाम से एक कार्गो बुक है जिसमें जाली पासपोर्ट, ATM कार्ड और 140 ग्राम MDM मिला है। 

डॉक्‍टर ने पर्सनल डेटा शेयर किया

इसके बाद आरोपी देवाशीष ने कॉल को ट्रांसफर कर खुद को फर्जी CBI अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से बात करवाई, जिसने डॉ. गुप्ता को धमकाया कि उन्हें सात साल की जेल हो सकती है। डर के चलते डॉक्टर ने अपनी पर्सनल जानकारी जैसे- बैंक खाता, पैन नंबर और संपत्ति विवरण साझा कर दिया। 

कोर्ट ने 7 साल की सजा सुनाई और जुर्माना भी लगाया

आरोपियों ने डरा-धमकाकर डॉक्टर को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और अलग-अलग 4 बैंक खातों में कुल 85 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस जांच में आरोपी की पहचान देवाशीष के रूप में हुई। जिसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। ठोस सबूत और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उसे 7 साल की सजा और जुर्माना भी लगाया। बता दें आरोपी देवाशीष आजमगढ़ के अजमतगढ़ क्षेत्र के मसौना गांव का रहने वाला है।

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