नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के तर्ज पर अब मध्य प्रदेश में भी पेपर लीक पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। सरकार पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बना रही है। जिसमें पेपर लीक में दोषी पाये जाने पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना और 10 साल की जेल का प्रावधान है। सरकार जल्द ही इसको लेकर अध्यादेश लागू कर सकती है। इस कानून में व्यक्ति, सर्विस प्रोवाइडर, कंपनी और परीक्षा केंद्र, सभी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस मामले में हर तरह की परीक्षा का पेपर लीक करना गंभीर अपराध माना जाएगा। पेपर लीक की घटना में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सरकार इस कानून के तहत कार्रवाई करेगी।
संपत्ति होगी अटैच
जानकारी के अनुसार अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक मामले में लिप्त है तो सरकार उसकी संपत्ति भी अटैच कर लेगी। इस एक्ट का प्रारूप फाइनल हो गया है और इसे जांच के लिए विधि विभाग को भेजा गया है। बताया जा रहा है कि सरकार इस कानून को इसी विधानसभा सत्र में लाना चाहती थी, लेकिन अब इसे अध्यादेश के जरिये सत्र के बाद लागू किया जा सकता है।
इस कानून के मुताबिक इस मामले में पकड़े जाने वाले आरोपियों को बेल नहीं मिल पायेगी। अगर इसमें अपराध सिद्ध हो जाता है तो दोषियों पर जुर्माना और सजा के अलावा परीक्षा में होने वाला खर्च भी दोषियों से ही वसूला जाएगा। यहीं नहीं उनकी संपत्ति को भी जब्त कर लिया जाएगा। इस कानून के तहत पेपर लीक मामले की जांच या तो असिस्टेंट कमिश्नर करेगा या DSP। इससे नीचे के अधिकारी पेपर लीक मामले की जांच नहीं कर सकते।
सर्विस प्रोवाइडरों की ये रहेगी जिम्मेदारी
इस मामले में सरकार SIT बनाकर या दूसरी किसी जांच एजेंसी से भी जांच करा सकती है। इस कानून के अनुसार सर्विस प्रोवाइडर वो होगा जो कंप्यूटर या बाकी सिस्टम परीक्षा केंद्र को सौंपेगा। सर्विस प्रोवाइडर परीक्षा केंद्र अपनी मर्जी से नहीं बदल सकते हैं। वहीं अगर किसी सर्विस प्रोवाइडर को पेपर लीक की आशंका है या कोई अन्य गड़बड़ी है। तो उसे पुलिस को तुरंत सूचना देनी होगी। नहीं तो उसे दोषी माना जाएगा।
बता दें कि इसी तरह का कानून अध्यादेश के जरिये उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा भी लाया गया है। जिसमें दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेगी। इस कानून के मुताबिक दोषियों को 2 साल से लेकर आजीवन कारावास तक सजा हो सकती है। वहीं 1 करोड़ रुपये जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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