Bengal News: कभी ईंट भट्ठे पर था मजदूर आज संदेशखाली का डॉन, जानें शाहजहां शेख का मजदूर से करोड़पति तक का सफर!

Bengal News: आखिरकार राशन घोटाला और संदेशखाली हिंसा का मुख्य आरोपी टीएमसी नेता शाहजहां शेख गिरफ्तार हो चूका है।
Shahjahan Sheikh
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आखिरकार राशन घोटाला और संदेशखाली हिंसा का मुख्य आरोपी टीएमसी नेता शाहजहां शेख गिरफ्तार हो चूका है। पश्चिम बंगाल जिले का उत्तर 24 परगना का संदेशखाली बांग्लादेश की सीमा से लगता हुआ क्षेत्र है। इसी का फायदा उठाकर शाहजहां यहां आकर रहने लगा था। जब वह संदेशखाली में आकर बसा तो उसने अपनी रोजी रोटी के लिए खेतों और ईंट-भट्ठों पर एक मजदूर की भांति कार्य करना शुरू किया था। आज हम इस स्टोरी में उसके एक ईंट-भट्ठें में मजदूरी से लेकर संदेशखाली के आतंक का डॉन बनने की कहानी पर चर्चा करेंगे।

उसपर संदेशखाली में महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने का भी बहुत बड़ा आरोप है

शाहजहां शेख 55 दिनों से फरार चल रहा था। अब जाकर वह पुलिस की गिरफ्त में आ चूका है और उसपर बशीरहाट अदालत में केस चल रहा है। कोर्ट ने उसे 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। यहीं नहीं बल्कि उसपर संदेशखाली में महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने का भी बहुत बड़ा आरोप है। जिसको लेकर राज्य में आये दिन विरोध प्रदर्शन आम बात है।

बंगाल पुलिस ने बहुत ही बड़े दवाब के बाद शाहजहां शेख को 55 दिनों बाद गिरफ्तार कर लिया है। टीएमसी नेता शाहजहां ने बांग्लादेश से भारत आकर एक मजदूर के रूप में कार्य करना शुरू किया और धीरे धीरे करोडो की संपत्ति का मालिक बन गया। लेकिन उसने यह धन अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर नहीं बल्कि एक अपराधी के रूप में गैरकानूनी ढंग से अर्जित किया था। जिसका परिणाम उसे आज भुगतना पड़ रहा है।

जिसमे सरकारी अधिकारी बुरी तरह घायल हो गए

शाहजहां शेख के काले कारनामों का सच उसके द्वारा किये गए 10 हजार करोड़ रूपए के राशन वितरण घोटाले से पकड़ में आने लगे। राज्य में इस बड़े घोटाले में सबसे पहले ईडी ने शाहजहां के करीबी बंगाल के पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को गिरफ्तार किया था। इसी के बाद ईडी की टीम शाहजहां शेख को गिरफ्तार करने के लिए उसके घर संदेशखाली गयी थी, जहां शाहजहां के समर्थकों ने ईडी के अधिकारियों पर हमला कर दिया था। जिसमे सरकारी अधिकारी बुरी तरह घायल हो गए थे।

धीरे धीरे गैरकानूनी कार्य करते हुए अपराध की दुनिया में घुसता चला गया

शाहजहां शेख की राजनीती में प्रवेश उसके मामा मोसलेम शेख की सहायता से हुई थी। मोसलेम शेख पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली इलाके में माकपा के बड़े नेता थे। वह पंचायत प्रधान भी थे। शाहजहां ने अपने मामा के छत्र साया में ही मछली पालन केंद्र खोला था। उस समय दोनों मामा भांजे ने संदेशखाली के सभी मछली पालन केंद्रों पर अपना नियंत्रण बनाया हुआ था। इससे पहले शाहजहां संदेशखाली-सरबेरिया रूट पर चलने वाले ट्रेकर पर चढ़ने वाले यात्रियों के टिकटों की जांच करने का कार्य करता था। सबसे पहले जब वह बांग्लादेश से भारत आया था तो उसने अपने जीवन का निर्वाह करने के लिए खेतों और ईंट के भट्ठें में मजदूरी की। लेकिन धीरे धीरे गैरकानूनी कार्य करते हुए अपराध की दुनिया में घुसता चला गया।

वर्ष 2013 में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया

जब बंगाल से माकपा का सफाया होने लगा तो शाहजहां ने इस पार्टी से दूरी बनाना ही सही समझा। वर्ष 2011 में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी तो उसका झुकाव ममता बनर्जी की पार्टी की तरफ होने लगा। जिसके चलते उसने वर्ष 2013 में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया और धीरे धीरे ममता बनर्जी का विश्वास जीतने में सफल रहा। शाहजहां शेख बंगाल की राजनीति में पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को अपना गुरु मानता था।

उसके बैंक खाते में 1.92 करोड़ रुपये जमा हैं

शाहजहां शेख की संपत्ति का खुलासा उसके द्वारा राज्य चुनाव आयोग में दायर हलफनामे से हुआ है, जिसके अनुसार उसके पास करोड़ो की संपत्ति है। जिसमे उसके 17 वाहन, 14 एकड़ से अधिक जमीन और 2.5 करोड़ रुपये के सोने के गहने शामिल हैं। उसके बैंक खाते में 1.92 करोड़ रुपये जमा हैं।

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