उत्तर कोलकाता सीट पर तृणमूल के सुदीप बनर्जी और भाजपा के तापस राय में मुकाबला, जानें इसका राजनीतिक इतिहास

Loksabha Election 2024: कोलकाता उत्तर संसदीय सीट का गठन परिसीमन आयोग के सुझाव के बाद 2008 में किया गया। 2009 में पहली बार यहां लोकसभा चुनाव हुआ था।
Sudip Banerjee and Tapas Roy
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कोलकाता, (हि.स.)। लोकसभा चुनाव के ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल में चुनावी लड़ाई दिलचस्प हो गई है। उत्तर कोलकाता लोकसभा सीट राज्य की ऐसी सीट है जो हमेशा से हाई प्रोफाइल सीट रही है। यहां से इस बार भी सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने मौजूदा सांसद सुदीप बनर्जी को टिकट दिया है। वह तृणमूल संसदीय दल के नेता लंबे समय से रहे हैं। भाजपा ने इस बार उनके खिलाफ भी जिस उम्मीदवार को उतारा है वह भी बेहद खास है। उनका नाम है तापस राय जो चंद दिनों पहले ही तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। वह टीएमसी के विधायक थे और उनके तथा सुदीप बनर्जी के बीच हमेशा जुबानी जंग चलती रहती थी।

तापस साफ सुथरी छवि के नेता हैं

तापस साफ सुथरी छवि के नेता हैं और सुदीप बनर्जी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि तापस ने तो कई बार सुदीप पर भाजपा से ही सांठगांठ का आरोप लगाया है। पार्टी बदलने के बाद भाजपा ने उन्हीं को सुदीप बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार बना दिया है इसलिए लड़ाई दिलचस्प हो गई है। वाम दलों की ओर से अथवा कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस सीट पर कैंडिडेट की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि लोकसभा चुनाव में टक्कर सीधे तौर पर तृणमूल और भाजपा के बीच में हीं होनी है।

क्या है उत्तर कोलकाता लोकसभा सीट का राजनीतिक इतिहास

कोलकाता उत्तर संसदीय सीट का गठन परिसीमन आयोग के सुझाव के बाद 2008 में किया गया। 2009 में पहली बार यहां लोकसभा चुनाव हुआ था। इस चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सुदीप बंदोपाध्याय ने सीपीएम के कद्दावर नेता मोहम्मद सलीम को पराजित किया। सुदीप बंदोपाध्याय को चार लाख 60 हजार 646 वोट मिले तो मोहम्मद सलीम को तीन लाख 51 हजार 368 वोट मिले। इसके बाद मोहम्मद सलीम ने अपना क्षेत्र ही बदल दिया। कोलकाता उत्तर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र हैं- चौरंगी, एन्टाली, बेलेघाटा, जोरासांको, श्यामपुकुर, मानिकतला और काशीपुर बेलगछिया।

क्या है भौगोलिक स्थिति

उत्तरी कोलकाता, कोलकाता का सबसे पुराना क्षेत्र है, जहां संकरी छोटी गलियां और सैकड़ों शताब्दी पुरानी इमारतें और मंदिर हैं। साथ ही, सोभाबाजार राजबाड़ी भी है। अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण, क्षेत्र को आमतौर पर बाबू कोलकाता कहा जाता है।

पहले यह इलाका कोलकाता संसदीय क्षेत्र के तहत ही आता था। इस सीट के बनते ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने इस पर कब्जा कर लिया। यह शहरी सीट है और यहां शहरी मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। यह इलाका पश्चिम बंगाल की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र भी है।

क्या है 2019 का जनादेश

कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट पर तृणमूल ने अपने वर्तमान सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को एक बार फिर से मैदान में उतारा था। भाजपा ने भी इस सीट से अपने पुराने उम्मीदवार और पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रहे राहुल (विश्वजीत) सिन्हा को एक बार फिर से टिकट दिया। वहीं कांग्रेस ने यहां से सैयद शाहिद इमाम को उतारा तो कनिका बोस सीपीएम की कैंडिडेट थीं। इसके अलावा कई निर्दलीय भी चुनाव लड़ रहे थें। 2019 चुनाव में यहां पर कुल 21 कैंडिडेट मैदान में थें।

तृणमूल के सुदीप बंदोपाध्याय ने जीत बरकारार रखी, उन्हें चार लाख 74 हजार 891 वोट मिले। भाजपा के राहुल सिन्हा तीन लाख 47 हजार 796 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे। तो वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) प्रत्याशी कनिका बोस 71 हजार 80 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहीं और कांग्रेस के सैयद शाहिद इमाम 26 हजार 93 वोटों के साथ चौथे नंबर पर थे। शिवसेना प्रत्याशी शरावोन्ती दास के खाते में महज 901 वोट पड़े थे।

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