नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजस्थान की राजनीति में भाषा की मर्यादा एक बार फिर तार-तार हुई है। हवामहल सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक बालमुकुंद आचार्य का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सत्ता के रौद्र रूप और सड़क की भाषा के बीच का अंतर मिटा दिया है। मामला जयपुर की मीणा कॉलोनी में चल रहे एक अवैध निर्माण को रोकने का था, लेकिन विधायक के गुस्से ने इसे एक बड़े विवाद में बदल दिया है।
निगम की मिलीभगत पर फूटा गुस्सा
मीणा कॉलोनी में एक मकान को नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही सीज कर दिया था। नियमत: अब वहाँ कोई निर्माण नहीं होना चाहिए था। लेकिन, स्थानीय लोगों ने विधायक बालमुकुंद आचार्य से शिकायत की कि सीलिंग के बावजूद निर्माण कार्य बेखौफ जारी है।
यह सुनते ही विधायक आचार्य तुरंत मौके पर पहुँचे। वहाँ पहले से मौजूद लोगों ने जब उन्हें निगम की कार्रवाई की ढिलाई और निर्माण जारी रहने की पूरी कहानी बताई, तो विधायक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उनका सीधा आरोप था कि यह सब नगर निगम के कार्मिकों की मिलीभगत से चल रहा है।
”मैं आज इसी चौराहे पर उसे कूटुंगा, मर जाएगा साला”
मौके पर मौजूद लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में, विधायक अधिकारियों को फोन करने की कोशिश कर रही एक महिला को देखकर आग-बबूला हो जाते हैं। जब निगम अधिकारी का फोन नहीं उठा, तो विधायक ने गुस्से में जो कहा, वह अब वायरल हो चुका है। जिसमें वो कह रहे है कि, अगर वो मुझे मिला तो, मैं आज इसी चौराहे पर उसे कूटूंगा और उसका वीडियो भी बनाऊंगा । ये मामला यहीं नहीं रुका। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी जब कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो विधायक का धैर्य टूट गया। किसी व्यक्ति ने उन्हें शांत रहने को कहा, जिस पर विधायक ने और भी तीखी टिप्पणी की।
कोई बात नहीं, मर जाएगा साला, मेरा कहना नहीं मानेगा, उसका यही हाल होगा
यह भड़काऊ और आपत्तिजनक भाषा सार्वजनिक रूप से एक जन-प्रतिनिधि द्वारा इस्तेमाल की गई है, जो अब चर्चा का विषय बन गई है। विधायक बालमुकुंद आचार्य का यह वीडियो वायरल होने के बाद बहस छिड़ गई है। एक ओर, विपक्षी दल और सभ्य समाज के लोग जनप्रतिनिधियों की भाषा पर संयम न रखने की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अवैध निर्माण पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, पर जनप्रतिनिधि को अपनी मर्यादा नहीं लाँघनी चाहिए।
वहीं, दूसरी ओर, स्थानीय लोग और विधायक के समर्थक इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि यह गुस्सा नगर निगम की अत्यधिक लापरवाही के कारण पैदा हुआ है। उनका मानना है कि जब अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते और अवैध निर्माण को बढ़ावा देते हैं, तो इस तरह की सख्त प्रतिक्रिया जरूरी हो जाती है।
यह घटना यह सवाल खड़े करती है कि क्या अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की अनिवार्यता, जनप्रतिनिधि को सड़क की भाषा इस्तेमाल करने का लाइसेंस देती है? और क्या सिर्फ़ भाषा की आलोचना करना, निगम के उन भ्रष्ट तंत्र को नज़रअंदाज़ करना नहीं है, जो विधायक के गुस्से का मूल कारण है?
यह देखना बाकी है कि नगर निगम और पार्टी आलाकमान इस वायरल वीडियो और विधायक की तीखी टिप्पणियों पर क्या कार्यवाही करते हैं। क्या विधायक पर उनकी भाषा के लिए कोई कार्रवाई होगी, या उनके द्वारा उठाए गए अवैध निर्माण के मुद्दे पर निगम के अधिकारियों पर गाज गिरेगी।





