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Wednesday, March 18, 2026
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आंगनबाड़ियों में दर्ज 1 लाख 25 हजार 998 बच्चों में से 5 हजार 49 कुपोषित तो 250 अतिकुपोषित

गुना, 04 जून (हि.स.) । कहते है बच्चे देश का भविष्य होते है, किन्तू जिले में देश का यह भविष्य कुपोषण की चपेट में है। न तो यह अपने पैरों पर खड़ा हो पा रहा है और न मानसिक रुप से सक्षम बन पा रहा है। यह स्थिति तब है, जब बच्चों की सेहत सुधारने के नाम पर तमाम प्रयासों के जरिए हर साल लाखों रुपए स्वाहा किए जा रहे है। इस बीच बच्चों की सेहत भलें ही नहीं सुधरी हो, किन्तू इसकी जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग के अधिकारियों की सेहत में जरुर भरपूर सुधार दिख रहा है। खुद महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण को लेकर प्रस्तुत आंकड़े इस संवेदनशील मसले की भयावहता को दर्शा रहे है। जिसमें आंगनबाड़ियों में दर्ज करीब 1 लाख 25 हजार 998 बच्चों में से 5 हजार 49 बच्चे कुपोषित तो 250 बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में है। कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए के समक्ष यह स्थिति आई तो उन्होने इसे सुधारने के निर्देश दिए। इसके लिए घर-घर दस्तक देकर कारण तलाशने की बात कही गई। चांचौड़ा में 70 तो गुना ग्रामीण में 70 अति कुपोषित यूं तो पूरे जिले में ही कुपोषण के हालात काफी भयावह बने हुए है। ब्लॉकवार अध्ययन करें तो सामने आता है कि सबसे ज्यादा स्थिति चांचौड़ा और गुना ग्रामीण में खराब है। कुपोषण के मामले में चांचौड़ा अव्वल है। यहां 79 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में है तो गुना ग्रामीण में यह आंकड़ा 70 है। इसके साथ ही गुना शहरी में 17, राघौगढ़ में 49 बच्चे अतिकुपोषित हैं। किराए के भवन में चल रहे आंगनबाड़ी कैन्द्र बच्चों की सेहत सुधारने में अहम कड़ी माने जाने वाली आंगनबाड़ियों की स्थिति यह है कि इनके पास अन्य सुविधाएं तो छोडि़ए अपना खुद का भवन तक नहीं है। सिर्फ 546 आंगनबाडी केन्द्र खुद के भवनों में, 437 किराये के भवनों में तथा 677 अन्य शासकीय भवनों में संचालित हो रहीं है। इसमें भी न सिर्फ ग्रामीण बल्कि शहरी क्षेत्र की कई आंगनबाड़ी नियमित खुलती तक नहीं है। सुरक्षा के लिए मांगें होमगार्ड जिले में कुपोषण की खराब स्थिति को लेकर कलेक्टर ने शुक्रवार को विभागीय समीक्षा की। जिसमें कलेक्टर ने कई मुद्दों पर असंतोष व्यक्त किया। मसलन कुपोषण की स्थिति पर जहां वह चिंतित दिखाई दिए और आंकड़े को शून्य पर लाने की बात कही तो प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की प्रगति पर भी उनकी अप्रसन्नता सामने आई। बैठक में 789 महिलाओं को मातृ वंदना योजना का लाभ देने की बात कही गई। बैठक में गोयल ने सुरक्षा के लिए होमगार्ड सैनिक उपलब्ध कराने की मांग रखी। जिस पर कलेक्टर ने आश्वासन दिया है। इसके साथ ही जिले की आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से स्टाफ की कमी भी बैठक में सामने आई। बताया गया कि जिले में जिला कार्यक्रम अधिकारी के अलावा दो सहायक संचालक, 5 परियोजना अधिकारी तथा 45 पर्यवेक्षक कार्यरत हैं। जिले में 1226 आंगनबाडी कार्यकर्ता, 1226 सहायिका व 434 मिनी कार्यकर्ताओं के पद हैं। 70 क्षमता, भर्ती सिर्फ 35 कुपोषण की स्थिति को लेकर महिला एवं बाल विकास कितना गंभीर है। इसका एकमात्र सबसे प्रमुख उदाहरण यह सामने आता है कि बच्चों की सेहत सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पोषण पुर्नवास केन्द्र में बच्चों को भर्ती करने तक में विभाग रुचि नहीं दिखा रहा है। इस केन्द्रों में 70 बच्चों को भर्ती करने की क्षमता है, किन्तू वर्तमान में सिर्फ 35 बच्चे ही यहां भर्ती है। यानि कुल क्षमता के अनुपात में सिर्फ आधे बच्चे की भर्ती है। केन्द्र को लेकर बताया जाता है कि यहां अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जाता है। सामान्य क्षेणी के कुपोषित बच्चों की सेहत घर पर ही सुधारने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निगरानी करती है तो संबंधित विभाग के अधिकारी समीक्षा करते है। गंभीर स्थिति होने के बाद ही बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराया जाता है। कलेक्टर फ्रेंक ए नोबल ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि प्रयास यह करें कि कुपोषित बच्चों को कैन्द्र में भर्ती कराएं, जिससे उनका स्तर सामान्य हो सके। उन्होंने म्याना, बमोरी, आरोन और राघौगढ़ में एनआरसी में कम बच्चे भर्ती पाए जाने पर हिदायत दी कि कुपोषित बच्चों पर ध्यान देकर उन्हें पोषण पुर्नवास केंद्र तक भिजवाएं। विभाग में 43 शिकायतें दर्ज कुपोषण की स्थिति नहीं सुधारने वाला महिला एवं बाल विकास विभाग शिकायतों में भी अव्वल है। जिला कार्यक्रम अधिकारी आरबी गोयल ने बताया कि विभाग में 43 शिकायतें दर्ज हैं। वन स्टॉप सेंटर में प्राप्त आवेदनों के संबंध में बताया गया कि महिला हेल्प लाईन 181 द्वारा 76 तथा सीधे प्राप्त प्रकरण 7 को मिलाकर 83 प्रकरण प्राप्त हुए, 68 का निराकरण कर दिया गया, 15 शेष हैं। गोयल के मुताबिक बाल संप्रेषण गृह में 33 बच्चेे गुना, अशोकनगर एवं शिवपुरी के हैं। 7 से 18 वर्ष के किशोर न्याय बोर्ड के आदेश से विधि विरूद्ध विवादित 33 बच्चों में से 27 जमानत पर मुक्त हैं। 6 बच्चे निवासरत हैं। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक/राजू

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