आरा,9 मार्च(हि. स)।भोजपुर जिले में गंगा नदी के बाद दूसरी बड़ी लाइफलाइन माने जाने वाली नदी धर्मावती नदी अब लोगों की जिंदगी को निखारने के साथ साथ अपने दोनों तरफ के खेतों की तकदीर भी बदलेगी। फसलो का उत्पादन बढ़ाएगी तो किसानों की आर्थिक आय बढ़ाकर उन्हें सुख,समृद्धि और विकास के रास्ते पर लाएगी। धर्मावती नदी का पानी अमृत समान माना जाता है और लोग इसका इस्तेमाल पीने, स्नान करने और खेतों को हरा भरा करने में करते हैं। अब बिहार सरकार के लघु जल संसाधन विभाग ने इस नदी के पानी को बड़े स्तर पर खेतों में पहुंचाकर कृषि के लिए सिंचाई हेतु इस्तेमाल करने की योजना को आगे बढ़ाया है। धर्मावती नदी के अमृत समान पानी को खेतों की उपजाऊ भूमि के साथ जोड़ने और सालो भर खेतो को पानी उपलब्ध कराने को लेकर लघु जल संसाधन विभाग ने एक डीपीआर तैयार किया है। बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना पार्ट दो के तहत धर्मावती नदी पर चेक डैम बनाकर उसके सतही जलस्तर को लिफ्ट कर सैकड़ो एकड़ खेती वाले भूभाग पर सालो भर पानी पहुंचाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसके लिये विभाग ने डीआईआर बनाकर सरकार को भेज दिया है। अभी धर्मावती नदी के दोनों तरफ की उपजाऊ भूमि पर सब्जियों की बहुस्तरीय खेती होती है।यही नही बहुतायत में दलहन की खेती भी की जाती है। फैसलो की सिंचाई में किसानों को बड़े आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है और किसानों की रीढ़ टूट जाती है। भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखण्ड स्थित सरना गांव के निकट धर्मावती नदी की चौड़ाई कम है और इसी को ध्यान में रखकर वहां चेक डैम का निर्माण होने जा रहा है। चेक डैम में पानी को स्टोर कर विभिन्न बोरिंग के माध्यम से आसानी से पानी को लिफ्ट करके खेतो में सिंचाई के लिए भेजा जाएगा। करीब 650 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि को इस चेक डैम के माध्यम से खेतों में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाई जाएगी। फिलहाल हर खेत को पानी योजना के तहत करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से दस योजनाओ को पूरा करने के लिए डीआईआर तैयार कर लघु जल संसाधन विभाग को भेज दिया गया है। जानकार बताते हैं कि धर्मावती नदी में चेक डैम बनाने से भूगर्भीय जल का दोहन कम हो जाएगा और बोरिंग का इस्तेमाल भी कम हो जाएगा। चेक डैम के कारण नदी का पानी स्टोर हो जाएगा और जिससे क्षेत्र का भूगर्भीय जलस्तर अपने सामान्य स्तर पर रहेगा। चेक डैम के निर्माण हो जाने के बाद इस इस इलाके में सूखे की नौबत नही आएगी। धर्मावती नदी और गंगा नदी के दोआब के बीच की भूमि काफी उपजाऊ होती है और इन खेतो में मटर,छेमी,टमाटर,प्याज और आलू जैसी सब्जियां और फसलें बहुतायत में होती है। इन फसलों की खेती के लिए क्यारियों की जरूरत होती है और इन क्यारियों में चेक डैम का स्टोर पानी खेती के लिए वरदान साबित होगा।चेक डैम के इस पानी को किसान छोटे से बोरिंग के माध्यम से भी आसानी से खेतों में पहुंचा सकेंगे और खेतों में उपजाई गई फसलो को हरा भरा कर पूरे खेत को हरियाली में बिखेर सकेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/चंदा




