नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । नेपाल में सोमवार को सोशल मीडिया बैन के खिलाफ भड़के युवा सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन हिंसक हो गया और हालात बिगड़ते चले गए। पुलिस कार्रवाई में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 300 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस बेकाबू हालात के बीच गृहमंत्री रमेश लेखक ने पद से इस्तीफा दे दिया। स्थिति संभालने के लिए राजधानी काठमांडू में सेना तैनात करनी पड़ी। सेना ने संसद परिसर और उसके आसपास की सड़कों को अपने कब्जे में लेकर हालात काबू में करने की कोशिश शुरू की।
अवांछित तत्वों की घुसपैठ से हालात बिगड़े
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मौतों पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन मूल रूप से शांतिपूर्ण था, लेकिन अवांछित तत्वों की घुसपैठ से हालात बिगड़े। ओली ने दावा किया कि सरकार को सार्वजनिक संपत्ति और जनसुरक्षा बचाने के लिए मजबूरी में बल प्रयोग करना पड़ा।
ओली ने स्पष्ट किया कि सरकार का इरादा सोशल मीडिया साइट्स को पूरी तरह बैन करने का नहीं, बल्कि उन्हें नियंत्रित करने का था। साथ ही उन्होंने घटनाक्रम की जांच के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की, जो 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
सरकार ने वापस लिया बैन
सूचना व प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने कैबिनेट की आपात बैठक के बाद घोषणा की कि सरकार ने सोशल मीडिया बैन वापस ले लिया है। संबंधित एजेंसियों को तुरंत प्लेटफॉर्म फिर से शुरू करने का आदेश दिया गया। साथ ही उन्होंने ‘Gen-Z’ युवाओं से आंदोलन खत्म करने की अपील की।
गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा
नेपाल पुलिस प्रवक्ता बिनोद घिमिरे ने बताया कि काठमांडू की झड़प में 17 और सुनसरी जिले में पुलिस फायरिंग से 2 लोगों की मौत हुई। घातक हिंसा के बाद गृहमंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया, जिसे उन्होंने शाम को प्रधानमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में सौंपा।
अस्पतालों में कम पड़ी जगह
रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल ट्रॉमा सेंटर में 8, एवरेस्ट और सिविल अस्पताल में 3-3, काठमांडू मेडिकल कॉलेज में 2 और त्रिभुवन टीचिंग हॉस्पिटल में 1 व्यक्ति की मौत हुई। देशभर में 347 से अधिक घायल भर्ती हैं। बड़े अस्पतालों में जगह की कमी के कारण मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया जा रहा है।
काठमांडू सहित कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू
हिंसा भड़कने के बाद काठमांडू सहित कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया। प्रशासन ने चेतावनी दी कि प्रतिबंधित इलाकों में न तो धरना-प्रदर्शन की अनुमति होगी और न ही किसी तरह की भीड़ जुटाने दी जाएगी।
नेपाल सरकार ने फेसबुक, व्हाट्सऐप, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि उन्होंने तय समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल ‘रेगुलेशन’ के लिए था, लेकिन आम जनता को डर है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित होगी और सेंसरशिप बढ़ेगी।
पत्रकारों ने किया विरोध
काठमांडू में पत्रकारों ने धरना देकर सोशल मीडिया बैन को प्रेस की आज़ादी पर सीधा हमला बताया। वहीं, कंप्यूटर एसोसिएशन ऑफ नेपाल (CAN) ने चेताया कि फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे अहम प्लेटफ़ॉर्म्स को बंद करने से शिक्षा, बिजनेस, संचार और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी बुरी तरह प्रभावित होगी।




