नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पाकिस्तान का लाहौर शहर जिसे कभी “गार्डन सिटी” के नाम से जाना जाता था, अब दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में बदनाम हो गया है। लाहौर में स्मॉग का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। मंगलवार को डीएचए फेज-5 और अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के आसपास के कुछ इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर 459 और 433 तक पहुंच गया है, जो बहुत खतरनाक है।
सरकार के दावे खोखले
सरकार द्वारा कार्रवाई के दावों के बावजूद खतरनाक हवा लोगों का दम घोंट रही है और श्वसन संबंधी बीमारियों के मामलों से अस्पताल भर रहे हैं। डॉन के अनुसार, अनियंत्रित औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण और फसल अवशेषों को जलाने से स्मॉग संकट ने पाकिस्तान की पर्यावरण नीतियों की अक्षमता को उजागर कर दिया है।
प्रदूषण कम करने में विफल हो रहे सरकार के उपाय
पंजाब सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए रूट परमिट रद्द करने और ईंट भट्टों और औद्योगिक इकाइयों को सील करने जैसे उपायों को लागू किया है। लेकिन ये प्रयास बढ़ते प्रदूषण को कम करने में अपर्याप्त प्रतीत हो रहे हैं। मौसम विभाग ने भी बारिश की संभावना से इनकार किया है। जिससे शहर के निवासियों को स्थिर मौसम की स्थिति में जहरीली हवा का सामना करना पड़ रहा है।
हवा की गति कम होने से बढ़ रही है धुंध
मौसम विभाग ने हवा की गति 6 किमी/घंटा से भी कम होने का उल्लेख किया है, जिसमें आर्द्रता 81 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे धुंध और भी बढ़ गई है। पंजाब के अधिकारियों ने भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है और सड़कों पर छिड़काव अभियान शुरू किया है। लेकिन आलोचकों का तर्क है कि ये एक बड़ी समस्या का समाधान नहीं है। लाहौर का प्रदूषण संकट पाकिस्तान की विफलता उपेक्षा और खराब शासन के व्यापक पैटर्न को दर्शाती है।




