नई दिल्ली, रफ्तार। ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन की हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हो चुकी है। ईरानी मीडिया और एक अधिकारी ने यह दावा किया है। राष्ट्रपति रईसी का हेलिकॉप्टर रविवार की देर शाम क्रैश हुआ था। राष्ट्रपति अजरबैजान में डैम का उद्घाटन करने के बाद लौट रहे थे। ईरान के सरकारी टीवी की रिपोर्ट बताती है कि राष्ट्रपति रईसी, अजरबैजान में किज कलासी और खोदाफरिन बांध के उद्घाटन समारोह से लौट रहे थे। वे हेलिकॉप्टर में सवार होकर तबरेज शहर जा रहे थे। इसी दौरान हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। अब सवाल उठ रहा है कि राष्ट्रपति के काफिले में तीन हेलिकॉप्टर में थे और बाकी के दो हेलिकॉप्टर कैसे सही-सलामत पहुंच गए?
किसकी साजिश?
राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के हेलीकॉप्टर क्रैश में एक वर्ग के साजिश की आशंका जताई जा रही है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी है। अमेरिका के सीनेटर चक शूमर ने कहा है कि उनकी खुफिया एजेंसियों से बातचीत हुई है। अब तक किसी साजिश की आशंका या सबूत नहीं मिला है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह घटना पर नजर बनाए हैं।
इजरायल ने दी थी बदला लेने की धमकी
ईरान की इजरायल से कट्टर दुश्मनी है। दोनों की 50 साल से ज्यादा पुरानी दुश्मनी है। हाल में इजराइल के गाजा पर हमले के बाद दोनों की दुश्मनी काफी बढ़ गई थी। पिछले महीने ईरान ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। इसके बाद इजराइल ने बदला लेने की चेतावनी दी थी। इतना ही नहीं जवाबी हमला भी किया था।
एक्सपर्ट के दावे
मीडिल-ईस्ट मामलों के जानकार एवं विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) के सीनियर फेलो हीरक ज्योति दास ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अजरबैजान का इजराइल के साथ काफी इंटेलिजेंस कम्युनिकेशन है। दोनों एक-दूसरे से इंटेलिजेंस शेयर करते हैं। यह जानना जरूरी है कि ईरान और अजरबैजान शिया देश हैं। मगर, अजरबैजान काफी हद तक सेक्युलर है, इसलिए इन दोनों देशों में कड़वाहट है। अजरबैजान की इजराइल से मदद मिलती है। विशेषकर जब उसकी अर्मेनिया से लड़ाई हुई तो इजराइल साथ खड़ा था। ईरान में इजराइल का जासूसी नेटवर्क फैला है। इसमें अजरबैजान की अहम भूमिका है, इसलिए साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब ईरान में क्या होगा?
ईरानी का संविधान कहता है कि किसी सीटिंग राष्ट्रपति की अचानक मौत होती है तो उस परिस्थिति में आर्टिकल-131 के मुताबिक प्रथम उपराष्ट्रपति को अधिकतम 50 दिनों के लिए देश की कमान सौंपी जा सकती है। वैसे, इसके लिए ईरान सर्वोच्च नेता यानी आयतुल्ला खामनेई की स्वीकृति जरूरी होती है। इस हिसाब से ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद मोखबर को अब राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। इसके बाद उपराष्ट्रपति, संसद के अध्यक्ष और न्यायपालिका के प्रमुख से बनाई गई परिषद को अधिकतम 50 दिनों में नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव की व्यवस्था करनी होती है। इब्राहिम रईसी 2021 में राष्ट्रपति चुने गए थे। अगला राष्ट्रपति चुनाव 2025 में होने थे। अब उनकी मौत के बाद जल्द वहां दोबारा से चुनाव कराए जाने की पूरी संभावना है।
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