नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दा उठाया और भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाए। शरीफ ने दावा किया कि कश्मीरियों को आत्मनिर्णय का अधिकार मिलना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ खड़ा है और “भारत का अत्याचार” जल्द खत्म होगा।
आतंकवाद पर पाकिस्तान का दोहरा चेहरा
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में यह दावा भी किया कि पाकिस्तान हर तरह के आतंकवाद की निंदा करता है। उन्होंने विदेशी समर्थित संगठनों जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी पर अपने देश में हमले कराने का आरोप लगाया। लेकिन भारत ने इसे पाकिस्तान की सीमापार आतंकवाद को छुपाने की कोशिश बताया है।
पाकिस्तान को भारत का जवाब, सच छिपाया नहीं जा सकता
भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने शरीफ के बयानों पर करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का भाषण सिर्फ नाटक है। आतंकवाद पाकिस्तान की विदेश नीति का अहम हिस्सा है, कोई भी झूठ सच्चाई को नहीं छुपा सकता गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद प्रायोजित रिकॉर्ड की याद दिलाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन को सालों तक छुपाया। उसके मंत्री खुद मान चुके हैं कि वे दशकों से आतंकवादी शिविर चला रहे हैं, इस साल कश्मीर में हुए नरसंहार में पाकिस्तान-समर्थित संगठन को बचाने की कोशिश की गई।
Operation Sindoor में तबाह हुआ रनवे
पाक पीएम ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी भारत पर आरोप लगाया और झूठा दावा किया कि पाकिस्तान ने जीत हासिल की। इस पर गहलोत ने पलटवार किया, “पाकिस्तान जिसे जीत बता रहा है, वह असल में भारत के हमले में तबाह हुए एयरबेस, जले हुए हैंगर और टूटे हुए रनवे की तस्वीरें हैं। अगर पाकिस्तान को इसमें जीत दिखती है तो वे ऐसा मानते रहें। शरीफ ने भारत पर सिंधु जल संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया और कहा कि यह उनके लिए युद्ध जैसा है। लेकिन भारत ने साफ कहा कि उसने यह कदम पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थक रवैये के कारण उठाया है और संधि तभी बहाल होगी जब पाकिस्तान आतंकवाद रोकने के ठोस कदम उठाएगा। भारत ने यह भी दोहराया कि भारत-पाक के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे पक्ष की दखल की कोई जगह नहीं है। यह बयान सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संदेश था, जो बार-बार भारत-पाक वार्ता में मध्यस्थता के दावे करते रहे हैं। साफ है कि UN में पाकिस्तान का कश्मीर-राग और झूठे दावे फिर से भारत की सख्त प्रतिक्रिया के बाद बेनकाब हो गए हैं।




