नई दिल्ली, हिन्दुस्थान समाचार। ‘द केरला स्टोरी’ के बाद एक और फिल्म की खूब चर्चा हो रही है। धर्मांतरण, आतंकवाद और निर्दोष लोगों के ब्रेनवॉश पर बनी फिल्म ’72 हूरें’ के ट्रेलर को सेंसर बोर्ड ने पास करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बावजूद फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है।
ट्रेलर में दिखाया गया है कटा पैर
फिल्म के सह-निर्माता अशोक पंडित ने भी सीबीएफसी के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने कहा हैं कि ‘हमने एक शव के पैर दिखाए हैं, जिसे सीबीएफसी ने हटाने को कहा है। कुरान का संदर्भ हटाने को कहा गया है। पशु कल्याण के लिए कुछ चीजें हैं, लेकिन वे महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म है। आपने फिल्म को लेकर सेंसर सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। वहीं ये सीन ट्रेलर में हैं तो आप ट्रेलर को कैसे रिजेक्ट कर सकते हैं? हम ट्रेलर को डिजिटली रिलीज करेंगे।’ पहले हम इसे पीवीआर में रिलीज करने वाले थे, लेकिन अब हम इसे अंधेरी के एक क्लब में रिलीज करने जा रहे हैं।
प्रसून जोशी है जिम्मेदार
सीबीएफसी के फैसले पर नाराजगी जताते हुए अशोक पंडित ने कहा कि ‘वहां बैठे ये कौन लोग हैं? यह बहुत ही गंभीर मामला है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म के ट्रेलर को प्रमाणन देने से इनकार करने के इस फैसले के लिए सीबीएफसी के सभी अधिकारी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म ने IFFI में भारतीय पैनोरमा श्रेणी में पुरस्कार भी जीता है। आप उस फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट को कैसे नकार सकते हैं? सेंसर बोर्ड में कुछ गड़बड़ है और इसके लिए प्रसून जोशी जिम्मेदार हैं।’ उन्होंने कहा कि सीबीएफसी ने पहले ही फिल्म को मंजूरी दे दी थीं, लेकिन अब ट्रेलर को खारिज कर दिया है। इससे फिल्म मेकर्स को बड़ा झटका लगा है।




