नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-हत्या मामले में विरोध प्रर्दशन को लेकर TMC नेता व मंत्री देबनाथ ने एक विवादित टिप्पणी की है। नेता ने दावा किया है कि रिक्लेम द नाइट आंदोलन के दौरान दो लड़कों के साथ एक लड़की शराब पी रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन में शामिल लड़कियों के पैरेंट्स को अपनी बेटियों पर नजर रखनी चाहिए।
‘एक लड़की दो पुरुषों के साथ बैठकर पी रही थी शराब’
बुधवार को स्वप्न देबनाथ ने पूर्व बर्धमान जिले में जनता को संबोधित करते हुए दावा किया था कि हाल ही में उन्होंने कोलकाता में हुए रीक्लेम द नाइट आंदोलन के दौरान दो पुरुषों को एक महिला के साथ होटल में बीयर पीते हुए देखा था।
आपको बता दें कि 8 सितंबर की आधी रात को हजारों महिलाओं ने रीक्लेम द नाइट आंदोलन के तीसरे संस्करण में हिस्सा लिया था। पिछले महीने महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या मामले में महिला डॉक्टर के लिए न्याय की मांग के लिए वो प्रर्दशन में शामिल हुईं थी। यह प्रर्दशन दुखद घटना के एक महीने पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया था।
लड़की के माता पिता को घर ले जाने के लिए दी थी सूचना
स्वप्न देबनाथ ने आगे कहा कि क्या होता अगर महिला के साथ कोई अनहोनी हो जाती? उस समय उनके लोग वहां मौजूद थे और अगर वहां आसपास कोई नहीं होता तो क्या होता?
TMC नेता ने आगे कहा कि माता-पिता के लिए वो कहना चाहते हैं कि उनकी बेटी एक विरोध प्रर्दशन में शामिल होने गई थी। जो ठीक है, मगर बाद में लड़की को शराब पीते देखा गया। TMC नेता ने बताया कि उन्होंने उनके माता-पिता को घर ले जाने के लिए सूचित किया था। उन्होंने पुलिस को उसे सुरक्षित रखने के लिए सूचना दी थी।
देबनाथ ने बताया है कि उन्होंने अपने इलाके में सारे होटलों के मालिकों से विनती की है कि वो आधी रात किसी भी महिला को शराब न बेचें।
TMC नेता की टिप्पणी पर पार्टी ने किया किनारा
TMC नेता ने कहा है कि मां-बाप को अपनी बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। देबनाथ के इन बयानों पर TMC ने किनारा करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी किसी भी व्यक्ति के व्यवहार को निर्धारित नहीं कर सकती है और TMC नौतिक पुलिसिंग में शामिल नहीं हैं।
काम पर लौटेंगे डॉक्टर्स मगर अब नए तरीके से करेंगे प्रदर्शन
बता दें कि, ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए रेप-हत्या मामले के बाद प्रर्दशन कर रहे जूनियर डॉक्टर्स ने हड़ताल खत्म करने का निर्णय के साथ यह भी ऐलान किया है कि शनिवार 21 सितंबर से डॉक्टर्स काम पर लौट जाएंगे।
प्रर्दशनकारी डॉक्टरों ने बताया है कि शनिवार से पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन आवश्यक सेवाएं छोटे स्तर से शुरू कर दी जाएंगी। बंगाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों को चिकित्सीय सहायता प्रदान किया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि इंसाफ के लिए अभी उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में से एक डॉ. अकीब ने कहा कि अब विरोध को अलग तरीके से किया जाएगा। पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर फ्रंट का कहना है कि उन्होंने अपने आंदोलन से बहुत कुछ प्राप्त किया है, लेकिन अभी और कई चीजें प्राप्त करना बाकी हैं। उन्होंने कहा है कि उनके प्रर्दशन ने ही कोलकाता के पुलिस आयुक्त के साथ DME, DHS इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आंदोलन खत्म हो गया। डॉक्टर्स इसे अब नए तरीके से आगे बढ़ाएंगे। अकीब ने कहा है कि वो अभी भी मांग पर डटे हुए हैं कि प्रमुख सचिव को हटाया जाए।





