नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। CBI ने सोमवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, संदीप घोष और तीन लोगों को आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं में कथित भागेदारी में CBI ने गिरफ्तार कर लिया है। घोष के साथ गिरफ्तार तीन अन्य लोगों में बिप्लब सिंह, सुमन हाजरा और अफसर अली खान शामिल हैं।
अस्पताल के पूर्व उप-अधीक्षक अख्तर अली ने लगाए कई आरोप
CBI ने दो सप्ताह से अधिक दिन पूछताछ की और इसके बाद पूर्व प्रिंसिपल को देर शाम 2 सितंबर को गिरफ्तार किया। CBI ने संदीप घोष का पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया है।
घोष का कथित बॉडीगार्ड अफसर अली खान का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वह एक पूर्व प्रिंसिपल को धमकाते हुए नजर आ रहा है। अस्पताल के पूर्व उप-अधीक्षक अख्तर अली ने आरोप लगाया है कि अली खान अस्पताल से बायो-मेडिकल अपशिष्ट उत्पाद बेचने में शामिल थे।
अख्तर अली ने 2023 में state vigilance department को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने आरजी कर अस्पताल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घोटाले होने की शिकायत की थी। CBI ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में वित्तीय कदाचार (financial irregularities) के संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के साथ-साथ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और बेईमानी का आरोप लगाया है।
अख्तर अली ने अपने पत्र में यह भी बताया कि सुमन हाजरा, बिप्लब सिंह और अफसर अली के वित्तिय अनिमियताओं में शामिल होने की शिकायत की थी।
माफिया से कम नहीं डॉ घोष
अस्पताल के प्रोफेसर और पूर्व उप-अधीक्षक डॉ अख्तर अली नें संदीप घोष के बारे में कहा था कि वह बहुत भ्रष्ट आदमी है और वह छात्रों को फेल करते थे। साथ ही 20% कमीशन भी लेते थे। गेस्ट हाउस में छात्रों को शराब की सप्लाई भी करवाते थे। टेंडर के मामले में वह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के हर काम के लिए पैसे भी वसूलते थे। वह किसी माफिया की तरह पावरफुल आदमी है। डॉ अख्तर अली ने उनके खिलाफ 2023 में कानूनी शिकायत की थी लेकिन फिर उनका ट्रांसफर करा दिया गया।
घोष का करियर विवादों से भरा हुआ है। 2021 में, जब वह आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल बने, तब उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, अवैध गतिविधियों और पद के दुरुपयोग के आरोप लगने लगे। इन आरोपों में वित्तीय भ्रष्टाचार, अवैध कमीशन, टेंडर हेरफेर, और पोस्टमार्टम के लिए रखी गई लाशों के गैर-कानूनी इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
CBI ने घोष की गिरफ्तारी के बाद जो भी आरोप लगाया है वह सभी मामले संज्ञेय अपराध और गैर-जमानती प्रकृति के हैं।




