नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 2013 में पटना के गांधी मैदान में हुए विस्फोट मामले में पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को 4 दोषियों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। चारों दोषियों (हैदर अली, मोजिबुल्लाह, नोमान और इम्तियाज) को सिविल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने उनकी सजा को कम कर आजीवन कारावास में बदल दिया है। वहीं चारों दोषियों के 2 अन्य साथियों उमर और अजहरुद्दीन को सिविल कोर्ट के द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। निचली अदालत ने इस घटना को रेयर ऑफ द रेयरेस्ट बताया था।
इस घटना के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से NIA जांच की मांग की थी। NIA ने इस मामले में जांच करते हुए 2014 में सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। NIA के द्वारा गांधी मैदान बम विस्फोट मामले में 187 लोगों की कोर्ट में गवाही कराई गई थी।
क्या है मामला?
दरअसल यह विस्फोट 27 अक्टूबर, 2013 को पटना के गांधी मैदान में हुआ था। उस वक्त 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के लिए नरेन्द्र मोदी पटना पहुंचे थे। गांधी मैदान में उनकी हुंकार रैली चल रही थी। उसी दौरान पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या 10 पर स्थित सुलभ शौचालय के पास पहला बम विस्फोट हुआ था। उसके बाद गांधी मैदान और आसपास 6 स्थानों पर 6 विस्फोट हुए। इस विस्फोट में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 89 लोग घायल हुए थे।
4 आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी
नवम्बर 2021 में NIA कोर्ट के विशेष न्यायाधीश गुरुविंदर सिंह मल्होत्रा ने गांधी मैदान सीरियल बम विस्फोट के मामले में दोषी करार दिए गए 9 आतंकियों में से 4 को फांसी, 2 को उम्रकैद, 2 अन्य को दस-दस साल की कैद और 1 को 7 साल की कैद की सजा सुनाई थी
1 आरोपी को किया गया था बरी
इम्तियाज, हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी, नोमान अंसारी व मुजीबुल्लाह को एनआईए कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। वहीं दो आतंकियों उमर सिद्दकी और अजहरुद्दीन को उम्र कैद, जबकि अहमद हुसैन व फिरोज आलम को 10-10 वर्ष तथा इफ्तेखार को 7 वर्ष की कैद की सजा मिली थी। वहीं गांधी मैदान बम विस्फोट मामले में गिरफ्तार एक अन्य आरोपी फखरुद्दीन को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में 27 अक्टूबर को बरी कर दिया था।




