Zomato: आपके 1 ऑर्डर से जोमैटो को 3 तरह की कमाई, कंपनी के मोटे मुनाफे के तरीके जानें

Zomato Business Model : जोमैटो ने एक दिन पहले ही अपने तिमाही नतीजे जारी किए हैं। इसमें कंपनी को बड़ा मुनाफा हुआ है। हालांकि इसके अगले दिन यानी आज कंपनी के शेयर गिर गए।
जोमैटो।
जोमैटो। @zomato एक्स सोशल मीडिया।

नई दिल्ली, रफ्तार। ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) ने सोमवार को 31 मार्च 2024 को खत्म हुई तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी ने चौथी तिमाही में 175 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। बीते साल इसी तिमाही में 188 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। उसके बाद से कंपनी को लगातार मुनाफा हो रहा है। बहरहाल, हम आपको कंपनी का बिजनेस मॉडल (Zomato Business Model) बता रहे हैं। आप कंपनी को एक ऑर्डर देते हैं, उसे तीन तरह से कमाई होती है। पहला प्रोडक्ट की कीमत। दूसरा रेस्टोरेंट हैंडलिंग चार्ज, तीसरा डिलीवरी चार्ज।

1. रेस्टोरेंट लिस्टिंग से मुनाफा

जोमैटो की कमाई का सबसे बड़ा माध्यम कंपनी के एप पर रेस्टोरेंट लिस्टिंग है। एक रेस्टोरेंट की लिस्टिंग के लिए कंपनी 1000 रुपए लेती है। यह वन टाइम फीस है। इसके तहत रेस्टोरेंट ऑर्डर आएं या ना जोमैटो फीस वापस नहीं करती है।

2. विज्ञापन से तगड़ी कमाई

एप पर कंपनी कई रेस्टोरेंट के विज्ञापन दिखाती है। इसके एवज उन रेस्टोरेंट से मोटे पैसे वसूलती है। जिस रेस्टोरेंट को जितनी ज्यादा विजिबिलिटी देती है, उससे उतनी ज्यादा फीस वसूली जाती है। विज्ञापन के अलग-अलग पैकेज हैं। इसमें अलग-अलग ऑफर दिए जाते हैं।

3. रेस्टोरेंट से कमीशन वसूलना

कई बार किसी रेस्टोरेंट का खाना जोमैटो पर महंगा दिखता है। इसकी वजह है कि तमाम रेस्टोरेंट को जोमैटो के एप का इस्तेमाल करते हुए अपना प्रोडक्ट बेचने पर कमीशन देना होता है। इस कारण इस एप से खाना मंगवाने पर यह चार्ज भी रेस्टोरेंट मालिक ग्राहकों से वसूलते हैं। यह चार्ज 2-3 पैकेज में दिया जाता है, जो आपकी ऑर्डर वैल्यू का 23% से 27% होता है।

4. लॉयल्टी प्रोग्राम से कमाई

जोमैटो ने लॉयल्टी प्रोग्राम से अधिक ग्राहकों को खुद से जोड़ने की कोशिश की है। कंपनी लॉयल्टी प्रोग्राम चलाती है, ताकि वह अधिक से अधिक ग्राहकों को खुद से जोड़े। इसके तहत कंपनी जोमैटो गोल्ड का सब्सक्रिप्शन देती है, जिसकी कीमत अलग-अलग पीरियड के हिसाब से अलग हो सकती है। यह भी कमाई का जरिया है।

5. इवेंट्स टिकट सेल कर कमाई

जोमैटो द्वारा कुछ खास इवेंट की टिकट बेची जाती है। इन इवेंट के माध्यम से ग्राहकों को खास रेस्टोरेंट तक पहुंचाया जाता है, जिससे उस रेस्टोरेंट की कमाई होती है और उसका एक हिस्सा जोमैटो को मिलता है। जोमैटो पर यह फीचर Zomato Live नाम से उपलब्ध है।

6. प्लेटफॉर्म फीस 5 रुपए

कुछ ऑर्डर करने प्लेटफॉर्म फीस देनी होती है। यह फीस 5 रुपये है। कंपनी ने 2023 के अगस्त में 2 रुपये का प्लेटफ़ॉर्म शुल्क लगाना शुरू किया था। तब 3 रुपये था, जिसे बढ़ाकर 5 रुपए कर दिया गया है। कंपनी हर साल 1 अरब यानी 100 करोड़ सालाना ऑर्डर के आंकड़े पर पहुंची है। यानी सालाना 100 करोड़ ऑर्डर से कंपनी 500 करोड़ रुपए कमा सकती है।

7. क्विक कॉमर्स

जोमैटो का ही हिस्सा क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट है। इससे सामान मंगवाने में जो डिलीवरी फीस,प्लेटफॉर्म फीस या कोई अन्य चार्ज देते हैं, वह जोमैटो के ही खाते में जाता है। ब्लिंकिट पर तमाम वेंडर्स की लिस्टिंग का जो चार्ज है, वह भी जोमैटे को मिलता है। Goldman Sachs की मानें तो 2 साल में ब्लिंकिट की वैल्यू जोमैटो के मूल बिजनेस यानी ऑनलाइन फूड डिलीवरी से अधिक हो गई है। ब्लिंकइट का वैल्युएशन 13 अरब डॉलर हो गया है। यह मार्च 2023 में केवल 2 बिलियन डॉलर था। बता दें, जोमैटो का कुल वैल्युएशन 20 अरब डॉलर है। इसमें से 13 अरब डॉलर सिर्फ ब्लिंकिट का वैल्युएशन है।

8. हाइपरप्योर से आय

जोमैटो का एक और बिजनेस है। इसका नाम हाइपरप्योर है। इसमें वह अपने वेंडर्स को थोक में सामान सप्लाई करता है। यानी आप जोमैटो के वेंडर हैं और आपको आटा, चावल, दाल, सब्जी, फल या कोई पैकिंग का सामान चाहिए, तो वह सब आपको हाइपरप्योर से बहुत अच्छे दाम पर मिल सकता है। इस तरह कंपनी हाइपरप्योर से कमाई करती है।

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