नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से Raghav Chadha को हटा दिया गया है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। उनकी जगह अब Ashok Mittal इस जिम्मेदारी को संभालेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस बदलाव का असर उनकी सैलरी पर पड़ेगा?
क्या सैलरी में होगी कटौती?
इस बदलाव के बाद भी राघव चड्ढा की सैलरी में कोई कमी नहीं होगी। इसका कारण यह है कि डिप्टी लीडर का पद कोई संवैधानिक या वैधानिक पद नहीं होता, बल्कि यह पार्टी का आंतरिक संगठनात्मक पद है।
इस पद के साथ कोई अलग से सरकारी वेतन या भत्ता नहीं जुड़ा होता, इसलिए पद से हटने का उनकी आय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सांसद के तौर पर मिलते रहेंगे सभी वेतन और भत्ते
एक राज्यसभा सांसद के रूप में उन्हें पहले की तरह सभी तय वेतन और भत्ते मिलते रहेंगे। मौजूदा नियमों के अनुसार: मूल वेतन ₹1,24,000 प्रति माह, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता ₹70,000 प्रति माह, कार्यालय खर्च भत्ता ₹60,000 प्रति माह, और संसद सत्र या समिति बैठक में शामिल होने पर दैनिक भत्ता ₹2,500 मिलता है। ये सभी सुविधाएं हर सांसद को समान रूप से मिलती हैं, चाहे वह किसी भी पार्टी या पद पर हो।
क्या बदलता है पद से हटने के बाद?
हालांकि आर्थिक रूप से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन जिम्मेदारियों और राजनीतिक प्रभाव में बदलाव जरूर आता है। डिप्टी लीडर के तौर पर राघव चड्ढा पार्टी की संसदीय रणनीति, बहसों के समन्वय और अनुशासन बनाए रखने जैसे अहम कार्य संभालते थे। अब यह जिम्मेदारी अशोक मित्तल के पास चली गई है। इसका मतलब है कि संसदीय गतिविधियों में उनकी भूमिका पहले जैसी प्रभावशाली नहीं रहेगी।
अन्य सुविधाएं रहेंगी जारी
सांसद होने के नाते राघव चड्ढा को सरकारी आवास, रेल व हवाई यात्रा की सुविधा और CGHS के तहत चिकित्सा लाभ मिलते रहेंगे; डिप्टी लीडर पद से हटने का उनकी सैलरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सभी वेतन व सुविधाएं पहले की तरह जारी रहेंगी।





