नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। केंद्र सरकार ने अनियमित लोन देने पर अंकुश लगाने के लिए एक नया कानून लाने का प्रस्ताव दिया है। इस कानून का उद्देश्य उन व्यक्तियों और संस्थानों पर नियंत्रण करना है जो बिना आधिकारिक मान्यता के लोन देते हैं। प्रस्ताव के तहत कानून का उल्लंघन करने वालों को अधिकतम 10 साल की जेल और भारी जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
नियामक कानून के दायरे से लेने वाले लोन पर रोकथाम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक कार्य समूह ने नवंबर 2021 में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें अनियमित लोन एक्टिविटी पर अंकुश लगाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने का सुझाव दिया गया था। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य केवल अधिकृत संस्थानों को लोन देने की अनुमति देना और उन लोन एक्टिविटी को रोकना है जो किसी नियामक कानून के दायरे में नहीं आती हैं।
RBI द्वारा अधिकृत नहीं हैं
केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह मसौदा विधेयक के प्रावधान और प्रतिबंध तैयार किए हैं। विधेयक में उन सभी व्यक्तियों और संस्थाओं पर सार्वजनिक लोन का कारोबार करने से प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है जो RBI द्वारा अधिकृत नहीं हैं। ऐसे सभी लोन जो किसी भी नियामक कानून के अंतर्गत नहीं आते हैं, उन्हें अनियमित लोन के रूप में वर्गीकृत किया गया है, चाहे वे डिजिटल या अन्य माध्यमों से दिए गए हों। इसमें किए गए नए प्रावधानों के अनुसार किसी भी अनियमित लोन प्रोवाइडर 2-7 साल की कैद और 2 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
जुर्माने का क्या है प्रवधान
ऋणदाताओं को परेशान करने या गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करने वाले ऋणदाताओं को तीन से 10 साल की जेल और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। अब इस मामले में यह भी हुआ है कि सरकार ने हितधारकों को 13 फरवरी 2025 तक “विनियमित ऋण गतिविधियों पर प्रतिबंध (BULA)” शीर्षक वाले मसौदा विधेयक पर सुझाव और टिप्पणियां प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया है।
केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण कदम
उल्लेखनीय है कि ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें फर्जी लोन ऐप्स द्वारा ग्राहकों को ठगा गया है। कुछ मामलों में आत्महत्याएं भी हुई हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को ऐसे ऐप्स के विज्ञापन न दिखाने की हिदायत दी थी। Google ने सितंबर 2022 और अगस्त 2023 के बीच अपने प्ले स्टोर से 2,200 से अधिक धोखाधड़ी वाले लोन ऐप्स को भी हटा दिया था। ऐसे में यह माना जा रहा है कि प्रस्तावित कानून उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने और अनियमित लोन एक्टिविटी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है।





