नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। तेलंगाना के हैदराबाद में आबकारी विभाग ने हाल ही में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10 लाख रुपये की प्रीमियम शराब जब्त की। जांच में सामने आया कि यह शराब डिफेंस कैंटीन से खरीदकर खुले बाजार में बेची जा रही थी। इस मामले में एक रिटायर्ड सेना कर्मचारी का नाम भी सामने आया है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है। इस घटना ने कैंटीन से मिलने वाली सस्ती शराब के दुरुपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों सस्ती मिलती है कैंटीन में शराब?
सेना के जवानों को कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD) के जरिए कई चीजें रियायती दरों पर मिलती हैं, जिनमें शराब भी शामिल है। कैंटीन में शराब बाजार से 30% से 50% तक सस्ती होती है। इसका मुख्य कारण है, एक्साइज ड्यूटी में छूट. जीएसटी में राहत, सरकारी सब्सिडी इसी वजह से बाहर 1500 रुपये में मिलने वाली बोतल कैंटीन में करीब 500 से 800 रुपये में मिल जाती है।
रैंक के हिसाब से मिलता है कोटा
सेना में शराब खरीदने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं और हर जवान को सीमित मात्रा में ही खरीदारी की अनुमति होती है, जिसमें सीनियर अधिकारियों को लगभग 10 बोतल प्रति माह, JCO (जूनियर कमीशंड अधिकारी) को 6 से 7 बोतल प्रति माह और अन्य जवानों (OR/NCO) को 4 से 5 बोतल प्रति माह मिलती है, और यह कोटा सेवारत (Serving) व सेवानिवृत्त (Retired) दोनों सैनिकों पर लागू होता है।
खरीद का सिस्टम कितना सख्त है?
CSD कैंटीन से शराब खरीदने के लिए स्मार्ट कार्ड अनिवार्य होता है। बिना कार्ड के एंट्री नहीं मिलती हर खरीद का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाता है तय कोटे से ज्यादा खरीद संभव नहीं इसके अलावा, जवान अपनी पसंद के अनुसार शराब और बीयर में अदला-बदली भी कर सकते हैं।
2023 के बाद क्या बदले नियम?
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब जवान अपने मासिक कोटे का 50% हिस्सा महंगी शराब (2000 रुपये से अधिक कीमत वाली) पर भी खर्च कर सकते हैं। इससे प्रीमियम ब्रांड्स की उपलब्धता बढ़ी है। कड़े नियमों के बावजूद कैंटीन से खरीदी गई शराब का अवैध व्यापार एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। हैदराबाद की घटना यह दिखाती है कि सिस्टम में कहीं न कहीं सेंध लग रही है। सेना की कैंटीन में सस्ती शराब मिलना जवानों को दी जाने वाली एक खास सुविधा है। लेकिन इसका गलत इस्तेमाल रोकना जरूरी है, ताकि इस सुविधा का लाभ सिर्फ देश की सेवा में लगे सैनिकों तक ही सीमित रहे।




