नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश में लगातार बढ़ती LPG सिलेंडर की कीमतों के बीच अब एक नई तकनीक चर्चा में है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री Nitin Gadkari ने नागपुर में एक खास कार्यक्रम के दौरान इथेनॉल बेस्ड स्टोव की तकनीक पेश की है। दावा किया जा रहा है कि यह नया चूल्हा पारंपरिक गैस सिलेंडर से सस्ता होगा और पर्यावरण के लिए भी बेहतर साबित हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्टोव इथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलेगा।
क्या है इथेनॉल बेस्ड स्टोव?
इथेनॉल बेस्ड स्टोव एक नई तरह का कुकिंग सिस्टम है, जो इथेनॉल फ्यूल की मदद से खाना पकाता है। इथेनॉल एक अल्कोहल बेस्ड फ्यूल होता है, जिसे गन्ने, मक्का और दूसरे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह भारतीय तकनीक है और इसे भारत में ही विकसित किया गया है।
पानी और इथेनॉल से कैसे जलेगा चूल्हा?
इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि इसमें इथेनॉल के साथ करीब 7 प्रतिशत पानी मिलाया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को स्टोव के टैंक में डाला जाता है। स्टोव ऑन करने पर इससे गैस चूल्हे जैसी साफ और लगातार जलने वाली फ्लेम निकलती है। दावा किया गया है कि इसमें धुआं बहुत कम निकलता है और खाना भी जल्दी पकता है।
कैसे काम करेगा यह नया स्टोव?
इस स्टोव में एक छोटा फ्यूल टैंक दिया जाएगा, जिसमें इथेनॉल और पानी का मिश्रण डाला जाएगा। जैसे ही स्टोव चालू किया जाएगा, यह मिश्रण जलकर फ्लेम पैदा करेगा और खाना पकाया जा सकेगा। इस तकनीक के आने से भविष्य में LPG सिलेंडर पर निर्भरता कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या बोले नितिन गडकरी?
नागपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि यह स्टोव कमर्शियल गैस सिलेंडर की तुलना में काफी सस्ता पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इससे खाना पकाने का खर्च कम होगा विदेशों से गैस आयात पर निर्भरता घटेगी किसानों की आय बढ़ेगी पर्यावरण को कम नुकसान होगा।
कब तक बाजार में आएगा यह चूल्हा?
फिलहाल इस तकनीक की बड़े स्तर पर बिक्री शुरू नहीं हुई है। माना जा रहा है कि सुरक्षा परीक्षण और सरकारी मंजूरी के बाद आने वाले समय में इसे आम लोगों के लिए लॉन्च किया जा सकता है। हालांकि अभी तक इसकी कीमत और लॉन्च डेट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इथेनॉल स्टोव के बड़े फायदे
सरकार का दावा है कि इथेनॉल आधारित स्टोव घरेलू और होटल दोनों के खर्च को कम कर सकता है।
प्रदूषण होगा कम
लकड़ी, कोयला और मिट्टी के तेल की तुलना में यह काफी साफ तरीके से जलता है। इससे धुआं कम निकलता है और घर के अंदर की हवा ज्यादा प्रदूषित नहीं होती।
किसानों को होगा फायदा
इथेनॉल गन्ने और मक्का जैसी फसलों से तैयार किया जाता है। इसकी मांग बढ़ने से किसानों की फसल की खपत बढ़ सकती है और उनकी कमाई में भी इजाफा हो सकता है।
विदेशी गैस पर निर्भरता घटेगी
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल और गैस खरीदकर पूरा करता है। अगर इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ता है, तो देश का आयात खर्च कम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक सफल रहती है तो आने वाले समय में यह LPG का बड़ा विकल्प बन सकती है। इससे न सिर्फ लोगों का खर्च कम होगा बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंच सकता है।





