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Thursday, March 19, 2026
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दिव्यांग माता-पिता की सेवा करने पर मिलती है टैक्स पर छूट, जानिए क्या है सरकारी नियम

नई दिल्ली। यदि किसी व्यक्ति के घर में दिव्यांग माता-पिता है और वह उनकी सेवा करता है, तो इनकम टैक्स (income tax saving) में उस व्यक्ति को छूट मिलती है। इसके लिए आयकर कानून में खास नियम है। यह नियम इनकम टैक्स की धारा 80DD से जुड़ा है। इस धारा को विशेष तौर पर दिव्यांग लोगों के लिए बनाया गया है।

क्या है कानून?

यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता 40 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांग हैं, तो वह व्यक्ति सेक्शन 80DD के तहत इनकम टैक्स में छूट (income tax saving) हासिल कर सकता है। धारा के मुताबिक, अगर 40 प्रतिशत तक दिव्यांग माता-पिता पर 75 हजार रुपये तक खर्च करते हैं तो उसका लाभ टैक्स छूट के रूप में मिलता है। इस पैसे को इनकम टैक्स में क्लेम कर सकते हैं।

अगर परिवार में 2 भाई हैं और दोनों अपने माता-पिता पर खर्च कर रहे हैं, तो यह देखा जाएगा कि उनकी खर्च की राशि कितनी है। अगर दोनों भाई 75-75 हजार रुपये खर्च करते हैं तो दोनों भाई इनकम टैक्स क्लेम (income tax saving) कर सकते हैं।

किन मौकों पर मिलती है टैक्स से छूट?

सेक्शन 80DD के मुताबिक, माता-पिता, पत्नी, बच्चे, भाई-बहन अगर दिव्यांग हों तो उनके इलाज या सेवा पर खर्च करने पर टैक्स छूट (income tax saving) दी जाती है। हिंदू संयुक्त परिवार के मामले में दिव्यांग कोई भी सदस्य हो सकता है। इस सेक्शन के तहत कुल कटौती की सीमा 1.5 लाख रुपये तक होती है, अगर दो भाई 75-75 हजार रुपये खर्च करते हैं।

इस धारा में भी कर सकते हैं टैक्स क्लेम

इसी तरह की एक धारा 80U है, जिसके तहत दिव्यांग अपने लिए टैक्स छूट (income tax saving) क्लेम कर सकते हैं। हालांकि, नियम कहता है कि अगर दिव्यांग व्यक्ति अपने लिए 80U के तहत टैक्स छूट क्लेम करता है, तो कोई दूसरा व्यक्ति दिव्यांग के लिए 80DD के तहत टैक्स छूट क्लेम नहीं कर सकता।

धारा 80DD के तहत कोई भी भारतीय व्यक्ति टैक्स छूट (income tax saving) क्लेम कर सकता है। इसमें आश्रित दिव्यांग के इलाज, उनकी ट्रेनिंग और पुनर्वास से जुड़ा खर्च शामिल हो सकता है। हालांक इसके लिए कुछ शर्तें हैं जैसे कि खुद व्यक्ति या आश्रित किसी ऐसी बीमारी से पीड़ित हो जिसमें वह काम करने में अक्षम हो। इस धारा में विकलांगता का स्तर 40 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।

कैसे तय होगी क्लेम की राशि?

इस नियम में सबसे खास बात यह है कि टैक्स छूट (income tax saving) की रकम उम्र से नहीं, बल्कि विकलांगता के आधार पर तय होती है। पीड़ित व्यक्ति कितने प्रतिशत विकलांग है, इस पर टैक्स क्लेम निर्भर करता है। अगर पीड़ित 40 प्रतिशत से ज्यादा लेकिन 80 प्रतिशत से कम विकलांग है तो टैक्स छूट क्लेम 75 हजार तक किया जा सकता है।

अगर विकलांगता गंभीर है तो यह छूट 1.25 लाख रुपये तक हो सकती है। सबसे जरूरी बात कि फॉर्म भरते वक्त विकलांगता का प्रतिशत सही बताना होगा। टैक्स बचाने (income tax saving) के लिए किसी भी तरह के झूठे दावों से बचना होगा। गलत जानकारी देने पर आयकर विभाग सख्त कार्रवाई कर सकता है।

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