नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। शारदीय नवरात्रि का आज छठा दिन है और इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी को ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। कहा जाता है कि ब्रज की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए मां कात्यायनी की ही पूजा की थी।नवरात्रि के इस विशेष दिन पर मां कात्यायनी को शुद्ध भाव और पवित्र भोग से प्रसन्न किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां को शहद और शहद से बने व्यंजन अत्यंत प्रिय हैं। खासकर शहद से बनी खीर का भोग लगाने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों की विवाह संबंधी समस्याओं को दूर करती हैं।
क्यों प्रिय है मां को शहद का भोग?
मां कात्यायनी को शहद और शहद से बने पकवान अत्यंत प्रिय हैं। विशेषकर शहद वाली खीर को प्रसाद रूप में अर्पित करने से मां अतिशीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। कहते हैं, जो कन्याएं सच्चे मन से मां कात्यायनी की पूजा करती हैं, उन्हें योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
शहद वाली खीर से करें मां को प्रसन्न
अगर आप भी मां कात्यायनी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो आज के दिन उनके लिए घर पर ही बनाएं स्वादिष्ट और पौष्टिक शहद वाली खीर। यहां जानिए इसकी आसान रेसिपी।
आवश्यक सामग्री
दूध – 1 लीटर
चावल – 1/4 कप (धोकर भीगने दें)
शहद – 1/2 कप
इलायची पाउडर – 1/4 चम्मच
सूखे मेवे (बादाम, काजू, पिस्ता) – 2-3 बड़े चम्मच
घी – 1 चम्मच (मेवे भूनने के लिए)
खीर बनाने की विधि:
एक भारी तले वाले बर्तन में दूध को उबालें।
दूध में उबाल आने के बाद धीमी आंच पर भीगे हुए चावल डालें।
चावल को तब तक पकाएं जब तक वे पूरी तरह से नरम और दूध गाढ़ा न हो जाए।
अब एक पैन में घी गर्म कर के उसमें सूखे मेवे हल्के भून लें और खीर में डालें।
इलायची पाउडर मिलाएं और गैस धीमी कर दें।
अब इसमें शहद डालें और हल्के हाथ से मिलाएं। ध्यान रहे, शहद कभी तेज़ आंच पर नहीं डालना चाहिए, इससे उसका स्वाद और पौष्टिकता प्रभावित हो सकती है।
अंत में खीर को 5-7 मिनट और पकाएं ताकि सभी स्वाद एकसार हो जाएं।
पूजा में करें उपयोग
इस स्वादिष्ट शहद वाली खीर को आप मां कात्यायनी को भोग स्वरूप अर्पित करें और संकल्प लें कि आप जीवन में सच्चे मार्ग पर चलेंगे। मां की कृपा से आपके विवाह में आ रही रुकावटें भी दूर हो सकती हैं।
धार्मिक महत्व
मां कात्यायनी को शक्ति, वीरता और सौंदर्य की प्रतीक देवी माना जाता है। इनकी उपासना से जीवन में धैर्य, निर्णय लेने की क्षमता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष रूप से यह दिन अत्यंत फलदायक माना गया है।





