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Saturday, March 7, 2026
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कुछ देशों में होली पर रंग खेलने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई, जानिए कौन से हैं वो देश?

भारत में होली का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन विश्व में कुछ मुस्लिम देश ऐसे भी हैं जहां होली खेलने पर कानूनी कार्यवाई हो सकती है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि रंगों, मेल-मिलाप और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। गलियों से लेकर बड़े मैदानों तक रंगों की बौछार और ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देती है। लेकिन जब बात कुछ मुस्लिम-बहुल देशों की आती है, तो वहां का सामाजिक और कानूनी ढांचा अलग नजर आता है। कई देशों में गैर-इस्लामी त्योहारों को सार्वजनिक रूप से मनाने पर प्रतिबंध या कड़ी निगरानी रहती है। हालांकि निजी स्तर पर या दूतावास परिसरों में कार्यक्रमों की अनुमति मिल जाती है, लेकिन खुले आम रंग खेलना संभव नहीं होता।

अफगानिस्तान: तालिबान शासन में सख्ती

Afghanistan में तालिबान शासन के बाद धार्मिक नियम बेहद सख्त हो गए हैं। यहां हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है। सार्वजनिक रूप से होली खेलना या जुलूस निकालना संभव नहीं है। त्योहार सीमित दायरे में, घरों या मंदिरों के भीतर ही मनाया जाता है। यदि कोई खुले तौर पर रंग खेलते पाया जाता है, तो उसे स्थानीय कानून के तहत पूछताछ, हिरासत या अन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

सऊदी अरब: निजी दायरे में सीमित आयोजन


Saudi Arabia में लंबे समय तक गैर-इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर सख्ती रही है। हालांकि हाल के वर्षों में सामाजिक सुधारों के चलते कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ढील देखने को मिली है, लेकिन होली जैसे रंगों वाले सार्वजनिक उत्सव की अनुमति नहीं है। भारतीय प्रवासी समुदाय दूतावास या निजी परिसरों में सीमित रूप से होली मना लेते हैं। सार्वजनिक स्थान पर रंग खेलना प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है, जिसके चलते जुर्माना या हिरासत जैसी कार्रवाई संभव है।

कतर और ओमान: अनुमति पर निर्भर उत्सव


Qatar और Oman जैसे खाड़ी देशों में धार्मिक स्वतंत्रता सीमित ढांचे में दी जाती है। यहां भी सार्वजनिक स्थानों पर रंग खेलना सामान्य रूप से स्वीकार्य नहीं है। हालांकि प्रवासी समुदाय निजी क्लबों या निर्धारित स्थलों पर प्रशासन की अनुमति से कार्यक्रम आयोजित कर सकता है। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

सजा कितनी कड़ी?


यह कहना सही नहीं होगा कि हर जगह “रंग दिखते ही जेल” हो जाती है। सजा का स्वरूप देश के कानून और परिस्थितियों पर निर्भर करता है-कहीं जुर्माना, कहीं हिरासत, तो कहीं आयोजन पर रोक। अधिकतर मामलों में मुद्दा सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक कानूनों के पालन से जुड़ा होता है, न कि विशेष रूप से होली से।

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