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Tuesday, March 10, 2026
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प्रशांत किशोर ने तोड़ा 24-घंटे का मौन व्रत, अपनी संपत्ति और कमाई को लेकर किया बड़ा ऐलान

प्रशांत किशोर ने कहा कि भले उनकी पार्टी जन सुराज पार्टी ने 2025 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन उनका यह मानना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रशांत किशोर ने कहा कि भले उनकी जन सुराज पार्टी ने 2025 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन उनका यह मानना है कि “लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हार की स्वीकारोक्ति के बाद वे गुरुवार (20 नवंबर 2025) को उस आश्रम गए जहाँ से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई थी भितिहारवा आश्रम। वहाँ उन्होंने 24 घंटे का मौन व्रत रखा और आत्म-मंथन किया।

संपत्ति को लेकर किया बड़ा ऐलान

मौन व्रत तोड़ते ही उन्होंने एक बड़ा घोषणा-पत्र पेश कियाऔर कहा कि अपनी कुल कमाई का 90 % हिस्सा जन सुराज को समर्पित करेंगे। पिछले 20 वर्षों में अर्जित संपत्ति में से परिवार के घर को छोड़ कर बाकी सब, जन सुराज को दान करेंगे। अपने समर्थकों से अपील की है कि प्रति वर्ष प्रति जनसुराजी मात्र 1,000 दान करें ताकि आंदोलन को मजबूत आधार मिल सके।

आंदोलन की नई रणनीति

प्रशांत किशोर ने बताया कि 15 जनवरी से बिहार के 1 लाख 18 हजार वार्डों में जाकर बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान के तहत जन-संवाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान मोहनदास गांधी की प्रेरणा से होगा और सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा कराने पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने चुनाव से ठीक पहले गरीब वोटरों को पैसे बांटने तथा लोकलुभावन वादों के माध्यम से वोट खरीदने का आरोप प्रदेश सरकार पर लगाया। साथ ही नीतीश कुमार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अब उन्हें ईमानदार मुख्यमंत्री मानना मुश्किल हो गया है क्योंकि उनकी सरकार में अपराधी प्रवृत्ति वाले लोगों को मंत्री बनाया गया है। इस पूरे घटनाक्रम से ये संकेत मिलते हैं जन सुराज पार्टी ने चुनाव हारने के बाद समय लेकर पुनरावलोकन करना शुरू कर दिया है। संपत्ति दान और मौन व्रत जैसे सामाजिक-आधारित कदम यह दर्शाते हैं कि परंपरागत चुनावी राजनीति से हट कर एक आंदोलन-धर्मी छवि बनाना चाहती है। जनता के बीच प्रत्यक्ष संवाद, गति और संख्या में बड़ी पैठ बनाने की दिशा में पार्टी आगे बढ़ने का संकल्प ले रही है। प्रशांत किशोर केवल चुनावी हार स्वीकार कर पीछे नहीं हट रहे बल्कि नई रणनीति, संपत्ति साझा करने का प्रस्ताव और ग्रामीण-वार्ड स्तर पर संवाद के माध्यम से आगे बढ़ने का इरादा रख रहे हैं। आगे देखें कि यह घोषणा जमीन पर कितनी असर दिखाती है।

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