नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारत के सहकारी क्षेत्र ने ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती देने के लिए इस साल के अंत तक अपनी खुद की कैब सर्विस शुरू करने का निर्णय लिया है। “भारत कैब सर्विस” को 300 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी मिली है और अब तक 4 राज्यों में 200 ड्राइवरों को इस सेवा में शामिल किया जा चुका है। इस पहल में 8 प्रमुख सहकारी समितियों का सहयोग है, जिनमें राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), इफको, और गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (GCMMF) जैसे प्रमुख संगठन शामिल हैं।
यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने का लक्ष्य
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने इस क्षेत्र के लिए एक व्यापक सहकारी नीति का अनावरण किया था, जिसमें 2025 तक सहकारी कैब सेवा शुरू करने का संकेत दिया गया था। एनसीडीसी के उप-प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य ड्राइवरों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना और यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और किफायती सेवाएं प्रदान करना है।” इस सेवा को पूरी तरह से सहकारी समितियों द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है और इसमें कोई सरकारी हिस्सेदारी नहीं होगी। इसके संस्थापक सदस्यों में कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) जैसे प्रमुख संगठन शामिल हैं।
दिल्ली, यूपी, गुजरात और महाराष्ट्र से 200 ड्राइवर जुड़े
रोहित गुप्ता ने जानकारी दी कि दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से अब तक 50-50 ड्राइवरों सहित कुल 200 ड्राइवर सहकारी कैब सेवा से जुड़ चुके हैं। सेवा का दायरा बढ़ाने के लिए सहकारी समिति अन्य सहकारी संगठनों से भी सक्रिय रूप से संपर्क कर रही है। साथ ही, राइड-हेलिंग ऐप विकसित करने के लिए टेक्नोलॉजी पार्टनर चुनने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। इस संबंध में एक टेंडर जारी किया गया है। रोहित गुप्ता के अनुसार, “कुछ ही दिनों में टेक पार्टनर को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।”
दिसंबर तक तैयार होगा ‘भारत कैब’ ऐप
सहकारी क्षेत्र द्वारा संचालित भारत कैब सेवा का ऐप दिसंबर 2025 तक तैयार हो जाएगा। NCDC के अनुसार, इस ऑल इंडिया प्लेटफॉर्म के लिए विपणन रणनीति बनाने के लिए एक टेक सलाहकार और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) बेंगलुरु को शामिल किया गया है। यह सेवा एक सहकारी मूल्य निर्धारण मॉडल को अपनाएगी, जिससे यात्रियों को किफायती रेट पर सेवा मिलेगी और ड्राइवरों को बेहतर मुनाफा सुनिश्चित किया जा सकेगा। वर्तमान में, नेटवर्क विस्तार के लिए सदस्यता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। यह पहल ऐसे समय पर की जा रही है जब सहकारी क्षेत्र तेजी से बढ़ते राइड-हेलिंग बाजार में ओला-उबर जैसी स्थापित निजी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपनी सामूहिक शक्ति और पारदर्शिता आधारित मॉडल को सामने ला रहा है।




