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Monday, April 6, 2026
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Free Look Period : इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के बाद 30 दिनों तक लौटा सकते हैं आप, नया नियम क्या कहता है?

Insurance Free Look Period: फ्री-लुक पीरियड बढ़ने से ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उनको पॉलिसी पसंद न आने या बेहतर पॉलिसी मिलने पर बिना शुल्क दिए सरेंडर करने को अधिक समय मिलेगा।

नई दिल्ली, रफ्तार। बीमा ग्राहकों को अब शानदार सुविधा मिलेगी। लाइफ इंश्योरेंस या जनरल इंश्योरेंस पॉलिसी लेने वालों को 15 दिनों की जगह 30 दिनों का फ्री-लुक पीरियड मिलेगा। बीमा नियामक इरडा (IRDAI) ने इसका प्रस्ताव बनाया है, जिसे बहुत जल्द मंजूरी मिलने वाली है। बता दें, फ्री लुक पीरियड का मतलब है कि बीमा ग्राहकों को नई खरीदी पॉलिसी पसंद नहीं आने पर लौटाने की निश्चित अवधि। उदाहरण के लिए आपने नई लाइफ इंश्योरेंस या जनरल इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी। इसके बाद आपको उसमें कुछ खामियां पता चलीं या उससे बेहतर कोई पॉलिसी मिल गई। इस परिस्थिति में आप एक निर्धारित समय तक उस बीमा पॉलिसी को सरेंडर कर सकते हैं। इसके लिए आपसे शुल्क भी नहीं लिया जाता है। इस अवधि को ही फ्री लुक पीरियड कहते हैं।

मौजूदा नियम क्या है?

बीमा नियमों में अनिवार्य फ्री लुक पीरियड का प्रावधान पहले से है। फिलहाल कंपनियों को हर लाइफ इंश्योरेंस एवं जनरल इंश्योरेंस प्रोडक्ट के साथ कम-से-कम 15 दिनों का फ्री लुक पीरियड देना होता है। इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसी या डिस्टेंस मोड के तहत खरीदी गई पॉलिसी के लिए निर्धारित अवधि 30 दिनों की है। वर्तमान नियम के मुताबिक कंपनियां सभी ग्राहकों को 30 दिनों का फ्री लुक पीरियड ऑफर कर सकती हैं, लेकिन यह मैंडेटरी नहीं होता है। IRDAI का प्रस्ताव 15 दिनों की अनिवार्य शर्त को 30 दिनों तक ले जाने का है।

ये है मसौदा

IRDAI ने इसके लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (प्रोटेक्शन ऑफ पॉलिसीहोल्डर्स इंटेरेस्ट्स एंड अलाइड मैटर्स ऑफ इंश्योरर्स) रेगुलेशंस 2024 नाम से मसौदा बनाकर भेजा है। मसौदे में कहा है कि इंश्योरेंस पॉलिसी पर पॉलिसी डॉक्यूमेंट रिसीव करने की तारीख से अगले 30 दिनों तक फ्री लुक पीरियड दिया जाए।

ग्राहक अच्छे से समझ सकेंगे पॉलिसी के दस्तावेज

इरडा ने कहा है कि 30 दिनों का समय मिलने से ग्राहक अपने संबंधित पॉलिसी के दस्तावेजों को अच्छे से समझ सकेंगे। दस्तावेजों को अच्छे से पढ़ने के बाद कोई बात समझ नहीं आती है तो वे संबंधित बीमा कंपनी से संपर्क कर संदेह दूर कर सकते हैं। कोई शर्त प्रतिकूल नहीं लगने पर पॉलिसी को सरेंडर कर सकते हैं।

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