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Thursday, March 19, 2026
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Navratri 2025: यूपी के पांच शक्तिपीठ जहां गिरे थे मां सती के अंग, दर्शन से पूरी होती है हर मुराद

नवरात्रि 2025 के अवसर पर उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख शक्तिपीठों वृंदावन, चित्रकूट, वाराणसी, प्रयागराज और पंचसागर में मां सती के अंग गिरने की मान्यता है|

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। शारदीय नवरात्रि का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। शक्ति साधना के इस पावन अवसर पर यूपी के शक्तिपीठों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। देवी पुराण में वर्णित उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख शक्तिपीठों का विशेष महत्त्व है, जहां देवी सती के केश, चूड़ामणि, वक्ष, मणिकर्णिका, दाढ़ और हस्तांगुल जैसे अंग गिरे थे। मान्यता है कि इन स्थलों के दर्शन मात्र से भक्तों की हर मनोकामना पूरी हो जाती है।

 1. श्रीउमा शक्तिपीठ, वृंदावन

वृंदावन में भूतेश्वर महादेव मंदिर के निकट स्थित उमा देवी मंदिर में माता सती के केश और चूड़ामणि गिरे थे। श्रद्धालु यहां वर्षभर आते हैं, लेकिन नवरात्रि में यहां खास भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है। यह शक्तिपीठ आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

 

2. रामगिरि शक्तिपीठ, चित्रकूट

चित्रकूट की पवित्र भूमि पर स्थित रामगिरि शक्तिपीठ में माता सती का दायां वक्ष गिरा था। यहां मां को शिवानी देवी के नाम से पूजा जाता है। नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती है और गूंजता है – जय माता दी।

 3. विशालाक्षी शक्तिपीठ, वाराणसी

काशी नगरी की धार्मिक गरिमा को और ऊंचा करता है विशालाक्षी शक्तिपीठ, जहां देवी सती की मणिकर्णिका गिरी थी। मां यहां विशालाक्षी और मणिकर्णी रूप में पूजित हैं। गंगा तट पर स्थित यह स्थल भक्तों को आत्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव कराता है।

 4. पंचसागर शक्तिपीठ

यद्यपि इसका सटीक भौगोलिक स्थान स्पष्ट नहीं है, पर मान्यता है कि इस स्थल पर माता की निचली दाढ़ गिरी थी। यह स्थान वाराही शक्ति से जुड़ा माना जाता है और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

 5. प्रयाग शक्तिपीठ, प्रयागराज

तीर्थराज प्रयागराज के संगम तट पर स्थित शक्तिपीठ में सती का हस्तांगुल गिरा था। यहां स्थित ललिता देवी, कल्याणी देवी और अलोपी देवी के मंदिरों को शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। संगम स्नान और देवी दर्शन से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

 श्रद्धा, शक्ति और साधना का संगम

उत्तर प्रदेश के ये पांच शक्तिपीठ न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक धरोहर को भी संजोए हुए हैं। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां दर्शन करना पुण्य फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि माता के इन रूपों के दर्शन से जीवन की हर बाधा दूर होती है और भक्तों को सुख-समृद्धि, शक्ति और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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