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Friday, March 13, 2026
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बागपत खाप पंचायत का सख्त आदेश, लड़कों पर हाफ पैंट और स्मार्टफोन की रोक, शादियों में फिजूल खर्च भी नहीं चलेगा

बागपत की खाप पंचायत ने लड़कों के हाफ पैंट पहनने और 18 साल से कम उम्र के लिए स्मार्टफोन इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। साथ ही शादियों में फिजूल खर्च और मैरिज होम में समारोह पर पाबंदी लगा दी है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बागपत की बड़ौत खाप पंचायत ने समाज सुधार और सांस्कृतिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए कई सख्त फैसले लिए हैं। पंचायत ने 18 साल से कम उम्र के लड़कों को स्मार्टफोन देने और हाफ पैंट पहनकर बाहर निकलने पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान किया है। साथ ही, शादियों में फिजूल खर्च और मैरिज होम में समारोह आयोजित करने पर पाबंदी लगाई गई है। खाप चौधरियों ने स्पष्ट किया कि ये नियम अब लड़कियों और लड़कों दोनों पर समान रूप से लागू होंगे और इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी पर अनुशासन और सामाजिक संस्कारों का प्रभाव बढ़ाना है।

”खाप पंचायत का यह कदम केवल बागपत तक सीमित नहीं रहेगा”

बड़ौत की इस पंचायत में खाप चौधरी सुभाष के नेतृत्व में समाज के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि आज के युवा हाफ पैंट पहनकर और स्मार्टफोन का दुरुपयोग करके सामाजिक मर्यादा की अवहेलना कर रहे हैं। इसलिए, इसे रोकना जरूरी है। पंचायत ने यह भी निर्देश दिया कि विवाह समारोहों को गांव या घर में ही आयोजित किया जाए, ताकि फिजूल खर्च और समय की बचत हो। शादी के निमंत्रण अब व्हाट्सएप के माध्यम से भी स्वीकार किए जा सकते हैं।

खाप पंचायत का यह कदम केवल बागपत तक सीमित नहीं रहेगा। राजस्थान की पंचायतों से प्रेरणा लेकर इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू कराने की योजना बनाई जा रही है। खाप चौधरी ब्रजपाल सिंह ने कहा कि लड़कों के स्मार्टफोन और हाफ पैंट पर रोक को पूरे प्रदेश में लागू कराने का प्रयास किया जाएगा। खाप चौधरी ओमपाल सिंह ने जोड़ते हुए कहा कि समाज में लड़के और लड़कियां समान हैं, इसलिए नियम भी समान रूप से लागू होने चाहिए।

”युवा पीढ़ी को अनुशासन में लाना है”

बागपत की खाप पंचायत के इस सख्त फैसले ने सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादा की दिशा में एक संदेश दिया है। युवा पीढ़ी को अनुशासन में लाना और फिजूल खर्च को रोकना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है। पंचायत के अनुसार, नियमों का पालन कराकर ही समाज और संस्कृति को बचाया जा सकता है। यह कदम वेस्ट यूपी में खाप पंचायतों द्वारा युवा और परिवारों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।

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