नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । निक्की हत्याकांड के बाद देशभर में दहेज प्रथा को लेकर बहस फिर से तेज हो गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के गौरीपुर मितली गांव में आयोजित ठाकुर समाज की केसरिया महापंचायत में एक ऐसा फरमान जारी किया गया जिसने सभी को चौंका दिया। महापंचायत में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष ठाकुर कुंवर अजय सिंह ने मंच से कहा कि कन्यादान के वक्त सोना-चांदी या नकदी देना जरूरी नहीं, लेकिन बेटियों को आत्मरक्षा के लिए रिवॉल्वर, पिस्तौल या देसी कट्टा जरूर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि गहनों से बेटियों की सुरक्षा नहीं होती, बल्कि वे अपराधियों के निशाने पर आ जाती हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और समाज में एक नई बहस को जन्म दे चुका है।
“बेटियों को दहेज में दें रिवॉल्वर”
अध्यक्ष ठाकुर कुंवर अजय सिंह के कन्यादान को लेकर दिए बयान ने नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि “आज के दौर में बेटियों को अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी। इसलिए कन्यादान के समय सोना-चांदी या नकदी भले न दो, लेकिन पिस्तौल, रिवॉल्वर, कटार या तलवार जरूर दो। और अगर ये सब नहीं दे सकते, तो कम से कम एक देसी कट्टा ही दे दो।”
“बेटियां अब नाजुक नहीं, दुर्गा हैं”
उनके इस अनोखे ऐलान के बाद बागपत की केसरिया महापंचायत तालियों की गूंज से भर उठी। इस घोषणा का समाज के कई लोगों ने जोरदार स्वागत किया और इसे समय की जरूरत बताया। पंचायत में मौजूद लोगों का कहना था कि अब वह दौर आ गया है जब बेटियों को केवल सजाने-संवारने की नहीं, बल्कि उन्हें लड़ने और अपनी सुरक्षा खुद करने की शिक्षा देने की जरूरत है। यह फैसला परंपराओं को झकझोरने वाला है, लेकिन साथ ही समाज को एक नया संदेश देता है। बेटियां अब अबला नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक हैं। इस ऐलान को जहां एक ओर बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक साहसिक कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे दहेज प्रथा पर चोट और बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।





