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Sunday, March 22, 2026
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‘वादा निभाओ, यही असली ताकत’, डीके शिवकुमार का इशारों में कांग्रेस आलाकमान को सीधा मैसेज

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने “वादा निभाने” और शब्द की ताकत पर जोर देकर कांग्रेस आलाकमान को इशारों में संदेश दिया, जिससे सीएम पद के ढाई साल के फॉर्मूले पर सियासी हलचल बढ़ी।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इशारों-इशारों में कांग्रेस आलाकमान को सीधा और कड़ा संदेश दिया है। उनके बयान को सत्ता परिवर्तन की मांग और ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनने के वादे पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। शिवकुमार ने अपने बयान में ‘शब्द की ताकत’ और ‘वादा निभाने’ पर जोर दिया, जिसे सीधे तौर पर आलाकमान को किया गया एक राजनीतिक रिमांडर माना जा रहा है।

‘वादा ही दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति’

एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीके शिवकुमार ने अपने बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा, एक कहावत है कि शब्द की ताकत ही दुनिया की ताकत है, यानी हमारे लिए अपना वादा निभाना दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है। चाहे वह जज हों, भारत के राष्ट्रपति हों, मैं, आप या आपके घर का कोई भी व्यक्ति, यही सबसे बड़ी शक्ति है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ सत्ता साझेदारी के तहत हुए कथित ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को याद दिलाने के लिए दिया गया है।

‘कुर्सी की कीमत नहीं पता…’ कहकर कसा तंज

इशारों-इशारों में बात करते हुए शिवकुमार ने अपने आसपास खड़े समर्थकों को बैठने का आग्रह किया और इस दौरान ‘कुर्सी’ को लेकर तंज कस दिया। यह टिप्पणी कांग्रेस के अंदर चल रहे कुर्सी विवाद की ओर स्पष्ट संकेत है। 

जो लोग मेरे पीछे खड़े हैं, उन्हें कुर्सी की कीमत नहीं पता। उन्हें जो भी कुर्सियां मिलती हैं, उन पर बैठने के बजाय, वे बेवजह खड़े रहते हैं।इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोगों के बीच हंसी छूट गई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसका गहरा अर्थ निकाला गया है।

1 दिसंबर तक हो सकता है सत्ता पर फैसला

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लीडरशिप को लेकर मतभेद की चर्चाएँ तेज हैं।उपमुख्यमंत्री का गुट लगातार यह दावा कर रहा है कि विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आलाकमान ने ढाई साल बाद सीएम बदलने का वादा किया था।वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का खेमा इस दावे को सिरे से खारिज करता रहा है।सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान इस गतिरोध को खत्म करने के लिए 1 दिसंबर तक सत्ता परिवर्तन पर कोई फैसला ले सकता है।

पिछले कुछ हफ्तों से शिवकुमार समर्थक विधायक दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व से मिल चुके हैं, जिससे बदलाव की अटकलें और तेज हो गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और वह मिलकर इस मसले का समाधान निकालेंगे।भले ही शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से सीएम बनने की मांग से इनकार किया है और कहा है कि वह पार्टी को कमजोर नहीं दिखाना चाहते, लेकिन उनका यह नया बयान आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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