back to top
19.1 C
New Delhi
Thursday, March 19, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

55 साल की महिला ने दिया 17वें बच्चे को जन्म: गरीबी और सिस्टम की खुली पोल, तो पति ने कहा- रहने को घर नहीं…

उदयपुर जिले के आदिवासी बहुल झाड़ोल इलाके से चौंकाने वाली खबर आई है। यहां 55 साल की रेखा कालबेलिया ने अपने 17वें बच्चे को जन्म दिया।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उदयपुर जिले के आदिवासी बहुल झाड़ोल इलाके से चौंकाने वाली खबर आई है। यहां 55 साल की रेखा कालबेलिया ने अपने 17वें बच्चे को जन्म दिया। यह घटना न सिर्फ गरीबी और अशिक्षा की हकीकत उजागर करती है बल्कि सरकारी योजनाओं की नाकामी पर भी सवाल खड़े करती है।

55 की उम्र में बनीं 17वीं बार मां

झाड़ोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती रेखा कालबेलिया ने 17वें बच्चे को जन्म दिया। रेखा पहले ही 16 बच्चों को जन्म दे चुकी हैं। इनमें से चार बेटे और एक बेटी जन्म के बाद ही चल बसे, जबकि उनके पांच बच्चे शादीशुदा हैं और उनके भी बच्चे हो चुके हैं।

परिवार के पास न घर, न शिक्षा

रेखा के पति कवरा कालबेलिया भंगार बीनकर किसी तरह परिवार का पेट पालते हैं। उनका कहना है कि रहने के लिए पक्का घर नहीं है। पीएम आवास योजना के तहत मकान मिला था, लेकिन जमीन उनके नाम पर न होने के कारण परिवार अब भी बेघर है। कवरा ने बताया कि बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए उन्हें साहूकार से 20% ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा। लाखों रुपये चुकाने के बाद भी ब्याज खत्म नहीं हो पाया। यही वजह है कि उनके बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए।

डॉक्टर बोले- अब करानी होगी नसबंदी

झाड़ोल सीएचसी के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रोशन दरांगी ने बताया कि जब रेखा भर्ती हुईं तो परिवार ने उन्हें चौथी संतान की मां बताया। बाद में पता चला कि यह उनका 17वां बच्चा है। अब डॉक्टर परिवार को नसबंदी के लिए जागरूक करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

“हम दो, हमारे दो” नारे की असलियत

सरकार सालों से “हम दो, हमारे दो” का नारा देती आई है और इसके प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। लेकिन झाड़ोल की यह घटना दिखाती है कि गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी के चलते ये नारे जमीनी स्तर पर असरदार साबित नहीं हो पाए हैं। आज जब सरकारें 21वीं सदी में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का दावा कर रही हैं, तब भी आदिवासी अंचल की यह तस्वीर बताती है कि जब तक गांवों और पिछड़े इलाकों का समग्र विकास नहीं होगा, तब तक कागजों पर दिखने वाला विकास धरातल पर हकीकत नहीं बनेगा।

Advertisementspot_img

Also Read:

राजस्थान में बड़ा फैसला: 2 से ज्यादा बच्चे वाले भी लड़ सकेंगे पंचायत और नगरपालिका चुनाव, कैबिनेट से बिल पास

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। Bhajanlal Sharma की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। अब राज्य में दो से अधिक संतान...
spot_img

Latest Stories

वृत्तिका नाम का मतलब-Vrittika Name Meaning

Vrittika Name Meaning वृत्तिका नाम का मतलब : Light...

एक दिन में कितनी कमाई करती है भारत सरकार? जानिए सालभर की कमाई का पूरा हिसाब

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत दुनिया की सबसे तेजी से...

सिर्फ 2 गेंदों में हैट्रिक? यह भारतीय गेंदबाज कर चुका है हैरतअंगेज कारनामा

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। IPL 2026 सीजन की शुरुआत होने...

Chaitra Navratri पर दिल्ली के इन जगहों से करें सबसे बढ़िया शॉपिंग? जानिए सारी जानकारी

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। चैत्र का महीना शुरू होने...

राजनीति में कभी फुल स्टॉप नहीं होता, खरगे के बयान पर PM मोदी ने की तारीफ

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राज्यसभा में विदाई समारोह के दौरान...

The Kerala Story 2 ने दिखाया कमाल, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पंहुचा 50 करोड़ के पार

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। 'द केरल स्टोरी' (The Kerala...