नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भारत जैसे देश में हैंडलूम एक ऐसा जरिया है जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। हाथों से बनाए गए कपड़ों को बढ़ावा देने के लिए और लोगों को जागरूक करने का एक प्रयास है। हथकरघा को भारत की हस्तकला का एक विरासत माना जाता है। यह दिन आने वाली पीढ़ियों को इस विरासत से अवगत कराने का एक प्रयास है।
बुनकरों के योगदान को प्रोत्साहन
हथकरघा बुनकरों को उनकी कुशलता के लिए जाना जाता है। बुनकर अपनी कड़ी मेहनत से अपना योगदान देते हैं उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। हथकरघा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का काम करता है।
स्वदेशी आंदोलन से जुड़ा है वजह
हथकरघा उत्पादन पूरी तरह से स्वदेशी होते हैं। इस तरह से यह आत्मनिर्भर भारत के लिए खास योगदान भी देते हैं। नेशनल हैंडलूम डे को पहली बार 7 अगस्त 2015 में मनाया गया था। इस दिन को चुनने के पीछे एक खास वजह है क्योंकि इस दिन स्वदेशी आंदोलन हुआ था। 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन के तहत भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देना और विदेशी उत्पादों का बहिष्कार करना था।
नेशनल हैंडलूम डे का महत्व
हथकरघा उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती है। इतना ही नहीं यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी देती है। इसके अलावा गरीबी को भी कम करती है। हथकरघा उत्पादों की मांग केवल भारत में ही नहीं बल्कि देश-विदेश में है।
क्या है इन उत्पादों की विशेषताएं
हथकरघा उद्योग की सबसे खास विशेषता यह है कि यह मशीन से बने कपड़ों से बेहद अलग होती है। इसके अलावा यह कपड़े बहुत टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। इतना नहीं इन कपड़ों की क्वालिटी भी बहुत अच्छी होती है। हथकरघा उत्पादों में कई सारे डिजाइंस और कलर्स इनको सबसे अलग बनाते हैं।
कैसे मनाया जाता है नेशनल हैंडलूम डे
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को कई तरीके से मनाया जाता है जिसमें फैशन शो, हस्तकला प्रदर्शनियां, सेमिनार और कार्यशालाएं शामिल है। इन कार्यक्रमों के जरिए हथकरघा उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और बुनकरों को प्रोत्साहित करना है।
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